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मगही, भोजपुरी व अंगिका झारखंड की मूल भाषाएं नहीं: आदिवासी छात्र संघ

आदिवासी छात्र संघ के लोगों ने बिहार की मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषा झारखंड की प्रतियोगिता परीक्षाओ में ‘नय चलतो’ का नारा लगाया है. गुरुवार को आदिवासी छात्र संघ के सुचित टोप्पो, सुरेश टोप्पो, सतीश भगत, संजय महली समेत अन्य लोगों ने संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया. झारखंड में मगही, अंगिका और भोजपुरी मांग का विरोध किया.
 
Ranchi : आदिवासी छात्र संघ के लोगों ने बिहार की मगही, भोजपुरी और अंगिका भाषा झारखंड की प्रतियोगिता परीक्षाओ में ‘नय चलतो’ का नारा लगाया है. गुरुवार को आदिवासी छात्र संघ के सुचित टोप्पो, सुरेश टोप्पो, सतीश भगत, संजय महली समेत अन्य लोगों ने संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया. झारखंड में मगही, अंगिका और भोजपुरी मांग का विरोध किया. 

 

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि ये तीन भाषा झारखंड की मूल भाषा नहीं है. ये भाषा केवल परिवार तक सीमित है. बिहार से सटे पलामू, गढ़वा और चतरा होने के कारण लोग बोलते है. झारखंड में किसी भी हालात में स्थान नहीं दिया जाएगा. झारखंड में इन तीनों भाषा को लागू कर झारखंड के भाषाओं पर थोपने का प्रयास किया जा रहा है. भाषाई राजनीति की जा रही है.

बिहार की भाषा लागू हुई तो होगा झारखंड बंद

आदिवासी छात्र संघ के लोगों ने कहा कि झारखंड में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषा जेटेट परीक्षाओं में लागू किया गया तो झारखंड बंद किया जाएगा. राज्य के आदिवासी मूलवासी सड़क पर उतरकर विरोध दर्ज कराएंगे. झारखंड में 9 भाषाएं ही मान्य है. जिसमें चार क्षेत्रीय पंचपरगनिया, नागपुरी, कुरमाली और खोरठा भाषा है. इसके अलावा जनजातीय भाषाओं  में मुंडारी, कुडुख, हो, संथाली और खड़िया भाषा है.
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