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महाराष्ट्र की राजनीति ने करवट बदली, शरद पवार की एनसीपी डिलिमिटेशन बिल पर मोदी सरकार के साथ

शरद पवार और सुप्रिया सुले

 NewDelhi : एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार के एक फेसले से पूरा विपक्ष सकते में है. खबर है कि  यदि मोदी सरकार मानसून सत्र  में 131वां संविधान (संशोधन) विधेयक (डिलिमिटेशन बिल) लाती है तो एनसीपी उसका समर्थन करेगी. श्री पवार का  फैसला राजनीतिक गलियारों में अति महत्वपूर्ण करार दिया जा रहा है. यह इसलिए क्योंकि एनसीपी (एसपी) विपक्षी खेमे से जुड़ी प्रमुख पार्टियों में शामिल है. 

 

आज बुधवार को एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि उनकी पार्टी केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन बिल का समर्थन करेगी.  हालांकि उन्होंने यह शर्त भी रखी कि केंद्र सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान करे.

 

दरअसल संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. इससे पहले सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. खबर है कि केंद्र की मोदी सरकार मॉनसून सत्र में 131वां संविधान (संशोधन) विधेयक दोबारा लाने की तैयारी कर रही है. इस कारण विपक्षी दलों में हलचल मची हुई है.

 

हालांकि अभी तक एनसीपी (एसपी) का इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.  लेकिन सूत्रों के अनुसार पार्टी परिसीमन बिल के पक्ष में वोट करने या समर्थन करने करने जा रही है. दरअसल परिसीमन बिल((डिलिमिटेशन बिल)  लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमा निर्धारण की प्रक्रिया से संबंधित है. इसके तहत जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा नये सिरे से निर्धारित होगी.

 

बता दें कि पूर्व में अप्रैल मे संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन बिल पेश किया गया था.  लेकिन यह पारित नहीं हो पाया था. विधेयक पारित हो जाता तो लोकसभा के सदस्यों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 कर दी जाती. उस समय बिल के पक्ष में 298 और  विरोध में 230 वोट पड़े थे. सदन में कुल 528 सांसद मौजूद थे. पारित होने के लिए सरकार को 352 वोट चाहिए थे, लेकिन सरकार 54 वोट से पीछे रह गयी थी.  


 
 

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