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पी चिदंबरम ने किया दावा, परिसीमन बिल पास कराने के लिए भाजपा NCP -SP और  डीएमके को रिझा रही है

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. इससे पहले सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. खबर है कि केंद्र की मोदी सरकार मॉनसून सत्र में 131वां संविधान (संशोधन) विधेयक दोबारा लाने की तैयारी कर रही है. इस कारण विपक्षी दलों में हलचल मची हुई है.
 
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम

NewDelhi : संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है. इससे पहले सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. खबर है कि केंद्र की मोदी सरकार मॉनसून सत्र में 131वां संविधान (संशोधन) विधेयक दोबारा लाने की तैयारी कर रही है. इस कारण विपक्षी दलों में हलचल मची हुई है.

 

 

इस संबंध में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने चिंता जताते हुए दावा किया है कि भाजपा संविधान (संशोधन) विधेयक  पारित कराने की पुरजोर कोशिश कर रही है. कहा कि वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और डीएमके का समर्थन जुटाने की कवायद में जुट गयी है.  चिदंबरम ने इन दोनों दलों से अपील की है कि वे इस विधेयक का समर्थन नहीं करें  
 


चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंगलवार को पोस्ट कर कहा कि यह वही विधेयक है, जो अप्रैल 2026 में संसद के पिछले सत्र में पारित नहीं हो पाया था. आरोप लगाया कि यह बिल महिलाओं के लिए लोकसभा-विधानसभा में एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने के नाम पर पेश किया गया था, लेकिन इसका असली मकसद लोकसभा सीटों का परिसीमन (Delimitation) और पार्टी को चुनावी राजनीतिक लाभ मिले, इस हिसाब से निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना था. 

 


बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा अप्रैल में जो 131वां संविधान (संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया था, उसमें लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने सहित निर्वाचन क्षेत्रों की परिसीमन प्रक्रिया शुरू करने का प्रावधान था.सर्वविदित है किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को संसद से पारित कराने के लिए दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत जरूरी है.

 

पी चिदंबरम ने सरकार की मंशा पर संदेह जताते हुए कहा कि महिलाओं को लोकसभा सहित राज्य विधानसभाओं में आरक्षण देने के लिए पहले ही 106वें संविधान संशोधन अधिनियम के जरिए प्रावधान किया जा चुका है. ऐसे में नया विधेयक लाने की कोई आवश्यकता नहीं है.

 

चिदंबरम दावा किया कि टीएमसी में टूट के बाद अब भाजपा एनसीपी (एसपी) और डीएमके को अपने पक्ष में लाने की कवायद में जुट गयी है,  ताकि संसद में इस विधेयक को पारित कराने में सफल हो जायें. हालांकि उन्होंने कहा कि एनसीपी (एसपी) और डीएमके इस विधेयक का वास्तविक उद्देश्य  जान गये हैं, चिदंबरम  ने आशा व्यक्त की कि दोनों दल अपने रुख पर कायम रहेंगे.

 

 

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