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झारखंड में चिकित्सा शिक्षा को बड़ा सहारा, 10.70 करोड़ के बजट में 3.60 करोड़ छात्रवृत्ति के लिए

Ranchi: झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए राहत की खबर है. राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए चिकित्सा शिक्षा मद में 10 करोड़ 70 लाख रुपये से अधिक का बजट जारी किया है, जिसमें अकेले छात्रवृत्ति के लिए 3 करोड़ 60 लाख रुपये रखे गए हैं. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी इस आदेश को राज्य की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है.
 

Ranchi: झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए राहत की खबर है. राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए चिकित्सा शिक्षा मद में 10 करोड़ 70 लाख रुपये से अधिक का बजट जारी किया है, जिसमें अकेले छात्रवृत्ति के लिए 3 करोड़ 60 लाख रुपये रखे गए हैं. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी इस आदेश को राज्य की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है.

 

छह संस्थानों के छात्रों को मिलेगा लाभ


इस आवंटन के दायरे में राज्य के छह प्रमुख संस्थान आते हैं. धनबाद का शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर का एमजीएम मेडिकल कॉलेज, हजारीबाग का शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज, दुमका का फुलो झानो मेडिकल कॉलेज, पलामू का मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज और रांची के बरियातू स्थित राजकीय फार्मेसी संस्थान. इन संस्थानों में अध्ययनरत छात्रों को इस छात्रवृत्ति का सीधा लाभ मिलेगा.

 

आदिवासी और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए बड़ी उम्मीद


झारखंड में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे अधिकांश छात्र आदिवासी, दलित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं. ट्यूशन फीस, किताबें, हॉस्टल और दैनिक खर्च का बोझ कई बार इन छात्रों की पढ़ाई के बीच में रोड़ा बन जाता है. ऐसे में यह छात्रवृत्ति उनके लिए महज आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि पढ़ाई जारी रखने का भरोसा है.

 

बुनियादी ढांचे पर भी खर्च होगी बड़ी राशि


छात्रवृत्ति के अलावा शेष राशि का उपयोग कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने में होगा. बिजली बिल के लिए 2 करोड़ 45 लाख, नए वाहनों की खरीद के लिए 75 लाख, पुस्तकालय उन्नयन के लिए 47 लाख 60 हजार, कार्यालय उपकरणों के लिए 47 लाख, भवन मरम्मत के लिए 42 लाख और जनरेटर ईंधन के लिए 17 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं.

 

जवाबदेही तय, प्राचार्यों पर होगी नजर

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने आदेश में स्पष्ट किया है कि राशि की निकासी और व्यय की संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित कॉलेजों के प्राचार्यों की होगी. प्रत्येक माह की 7 तारीख तक खर्च का विस्तृत विवरण विभाग को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा. सरकार की मंशा साफ है — पैसा सही हाथों तक पहुंचे और उसका हिसाब भी दुरुस्त रहे.

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