- Death Cum Retirement Gratuity (DCRG) व Commuted Value Of Pension (CVP) में हुआ ज्यादा भुगतान.
- एक मामले में ट्रेजरी ऑफिसर ने ZERO बढ़ा देने से 6.90 लाख के बदले 69.00 लाख का भुगतान कर दिया.
- 47 पेंशनरों का मामला नमूना जांच में पाया गया, अगर सारे पेंशनरों की जांच हो तो बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है.
Ranchi: ट्रेजरी व पेंशन पेमेंट Module की खामी से 47 पेंशनरों को 2.03 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान कर दिया गया है. यह भुगतान महालेखाकर द्वारा जारी किये गये एक ही प्राधिकारी पत्र (Authorisation) के आधार पर पेंशनरों को दो बार भुगतान करने सहित अन्य कारणों से हुआ है. ये मामले अभी नमूना जांच में पकड़े गये हैं, अब तक हुए भुगतानों की जांच करने पर इस तरह के बहुत सारे मामले सामने आने का अंदेशा है.
एक मामले में ट्रेजरी ऑफिसर द्वारा ZERO बढ़ा देने से 6.90 लाख के बदले 69.00 लाख का भुगतान कर दिया गया. और पेंशन पेमेंट मोड्यूल की खामियों की वजह से इसे वित्त विभाग का Integrated Financial Management System (IFMS) पकड़ नहीं सका. महालेखाकार के ऑडिट में यह मामला पकड़ में आया है.
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महालेखाकार ने 47 पेंशनरों को किये गये भुगतान की जांच में पाया कि इन्हें Death Cum Retirement Gratuity (DCRG) और Commuted Value Of Pension (CVP) में इस अतिरिक्त राशि का भुगतान किया गया है. किसी सेवानिवृत कर्मचारी या उसके पारिवारिक सदस्यों को DCRG और CVP में एक ही बार भुगतान किया जाता है. इस भुगतान में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पायी गयी है.
तीन तरह की गड़बड़ी
- - महालेखाकार द्वारा जारी किये गये एक ही Authorisation के आधार पर पेंशनर को दो बार भुगतान किया गया.
- - 12 मामलों में महालेखाकार द्वारा जिसके लिए Authorisation जारी किया गया उसके बदले दूसरे को भुगतान किया गया.
- - 33 मामलों में गलत बिल बनाने की वजह से अधिक भुगतान किया गया.
DCRG और CVP के भुगतान की प्रक्रिया
सरकारी कर्मचारियों के रिटायर होने या उनकी मृत्यु के बाद सरकार द्वारा DCRG और CVP का भुगतान एक बार कर्मचारी या उसके परिवार को किया जाता है. राज्य में लागू नियम के आलोक में राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत किये जाने और महालेखाकार के Authorisation के बाद भुगतान किया जाता है.
महालेखाकार से Authorisation मिलने के बाद ट्रेजरी ऑफिसर (TO) द्वारा DDO की भूमिका निभाते हुए DCRG, CVP और पहले पेंशन के भुगतान के लिए बिल तैयार किया जाता है. इसके बाद TO द्वारा DDO के रूप में बनाये गये बिल को पास कर ट्रेजरी से जुड़े बैंक के माध्यम से भुगतान के लिए आदेश जारी करता है. इसके बाद रकम पेंशनर या उसके पारिवार के खाते में जमा हो जाती है.
झारखंड में 2017-18 में e-Pension Portal लंच किया गया था. इस पोर्टल पर महालेखाकार को Authorisation जारी करने, पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जारी करने, ग्रेच्यूटी के भुगतान के लिए आदेश जारी करने की सुविधा है. महालेखाकार द्वारा भुगतान से संबंधित इन आदेशों को जारी करने के बाद IFMS पर भुगतान के लिए आगे की प्रक्रिया की जाती है.
भुगतान में गड़बड़ी के कुछ उदाहरण
01 - एक सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद महालेखाकार ने पत्नी को पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्यूटी के भुगतान के लिए आदेश जारी किया. महालेखाकार द्वार पेंशन भुगतान के लिए PPO NO- 1418xxxxx और ग्रेच्यूटी के लिए GPO NO- 1218xxxxx जारी किया गया. इसका भुगतान चाईबासा ट्रेजरी के माध्यम से किया जाना था. ट्रेजरी ऑफिसर ने इस आदेश के आलोक में मृत कर्मचारी को DCRG मद में 13.35 लाख रुपये का भुगतान किया. ठीक तीन महीने बाद 13.35 लाख रुपये का दूसरी बार भुगतान कर दिया गया. लेकिन IFMS, एक पेमेंट ऑर्डर से किये गये दो बारा भुगतान को नहीं पकड़ पाया.
02 - खूंटी के ट्रेजरी ऑफिसर ने महालेखाकार द्वारा जारी किये गये 3.57 लाख रुपये के भुगतान के GPO नंबर से ही DCRG मद में 7.15 लाख रुपये का भुगतान कर दिया. लेकिन ट्रेजरी ऑफिसर (TO) ने महालेखाकार को भेजे गये रिपोर्ट में दूसरी बार किये गये भुगतान की जानकारी नहीं दी. लेकिन IFMS द्वारा दूसरी बार किये गये भुगतान को नहीं पकड़ा जा सका.
03 - महालेखाकार ने महिला कर्मचारी की सेवानिवृति के बाद DCRG के भुगतान के लिेए GPO NO- 1217xxxxx जारी किया. इस आदेश के आलोक में रांची ट्रेजरी से संबंधित महिला को 5.65 लाख रुपये का भुगतान किया गया. इसके बाद इस महिला कर्मचारी को दो महीने बाद 8.98 लाख का भुगतान कर दिया गया. जांच में पाया गया कि महिला कर्मचारी को दूसरी बार किये गये भुगतान से संबंधित GPO NO दूसरे कर्मचारी के लिए जारी किया गया था.
04 - महालेखाकार द्वारा चक्रधरपुर सब-ट्रेजरी से एक पेंशनर को DCRG मद में 6.90 लाख रुपये के भुगतान के लिए GPO नंबर जारी किया गया. TO ने भुगतान का आदेश जारी करते वक्त इसमें एक शून्य जोड़ दिया. इससे पेंशनर को 6.90 लाख के बदले 69.00 लाख का भुगतान हो गया. गलती पकड़े जाने के बाद पेंशनर से 62.10 लाख की वसूली कर सरकारी खजाने में जमा कर दिया गया. लेकिन IFMS में वसूली का ब्योरा दर्ज नहीं है. अभी भी पेंशनर को 69.00 लाख के भुगातन का ही आंकड़ा उपलब्ध है.



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