Ranchi : रिम्स की 14वीं स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी बैठक को लेकर प्रकाशित खबरों के बीच रिम्स प्रबंधन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है. 28 अप्रैल को हुई SFC बैठक के बाद एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता निदेशक ने की.
बैठक में चिकित्सा अधीक्षक, डिप्टी डायरेक्टर फाइनेंस, अकाउंट ऑफिसर, प्रोक्योरमेंट ऑफिसर सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे. प्रबंधन ने बताया कि रिम्स में किसी भी उपकरण की खरीद निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही की जाती है और हर स्तर पर जांच के बाद ही अंतिम स्वीकृति दी जाती है.

प्रबंधन के अनुसार एक करोड़ रुपये तक की खरीद का अधिकार निदेशक को है और इसके लिए SFC की मंजूरी जरूरी नहीं होती है. साथ ही यह भी कहा गया कि अब तक किसी भी खरीद प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन सामने नहीं आया है.

बैठक में यह भी सामने आया कि रिम्स में उपकरण खरीद का काम फैकल्टी सदस्यों के जिम्मे है, जबकि अलग से पर्याप्त संसाधन और कार्यबल की कमी है. इसके कारण कई प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं.
प्रबंधन ने जानकारी दी कि अप्रैल माह में करीब 40 करोड़ रुपये की खरीद प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, क्योंकि मार्च में फंड लैप्स हो गया था. वहीं, कैंसर विभाग से जुड़ी करीब 42 करोड़ रुपये की खरीद प्रक्रिया भी लंबित है और इसके लिए केंद्र से स्वीकृत राशि के पुन: वैध होने की प्रक्रिया चल रही है.
करीब 92 करोड़ रुपये के उपकरणों की खरीद की निविदा प्रक्रिया भी जारी है, लेकिन फंड की कमी के कारण इसमें देरी हो रही है. निदेशक ने SFC की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अनावश्यक हस्तक्षेप के कारण खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.
प्रबंधन ने यह भी बताया कि उच्च न्यायालय ने जरूरी उपकरणों की खरीद तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया है और अब 30 मई तक यह प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है.
इसके अलावा करीब 3000 पदों पर नियुक्ति लंबित होने का मुद्दा भी उठाया गया. प्रबंधन ने कहा कि निदेशक पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं, इसके बावजूद उनकी कार्यशैली को लेकर गलत धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है.
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