Ranchi: राजधानी रांची में गिरते भूजल स्तर को लेकर हरमू रोड कुम्हार टोली निवासी मनोज कुमार प्रजापति ने एक अनोखी पहल की है. उन्होंने ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ की तर्ज पर ‘ड्रेन वाटर हार्वेस्टिंग योजना’ तैयार कर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेजा. इस प्लान को पीएमओ ने गंभीरता से लेते हुए रांची नगर निगम को अग्रसारित कर दिया है.
मनोज ने अपने पत्र में कहा है कि शहर के नालों में लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है. यह पानी अगर फिल्टर होकर धरती में समा जाए, तो भूजल स्तर गिरने से रोका जा सकता है. योजना के तहत नालों में 10 फीट और नदियों व नहरों में 20 फीट की बोरिंग कर जालीदार पाइप, गिट्टी और फोम से फिल्टरिंग की व्यवस्था की जाएगी. इससे गंदगी रुक जाएगी और साफ पानी धरती के भीतर जाएगा.
पीएमओ से पत्र आने के बाद नगर निगम ने मनोज को बुलाकर योजना की जानकारी ली और इसे उपयोगी बताया. लेकिन हकीकत यह है कि नगर निगम ने अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है. फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर घूम रही हैं. मनोज की चिंता है कि यह प्रस्ताव अफसरशाही के चक्कर में दबकर रह न जाए.
प्रजापति वाटर हार्वेस्टिंग जल संरक्षण ‘नाली योजना’ के फायदे
1. देश की सारी प्लास्टिक कचरा जालीदार पाइप के रूप में धरती में समा जाएगी.
2. धरती ठंडी होगी.
3. धरती का जल स्तर ऊपर आएगा.
4. नदियों का प्रदूषित होना 70 से 80 प्रतिशत तक कम हो जाएगी.
5. यही प्रक्रिया नहरों (Canal) में की जाए तो बाढ़ से होने वाली क्षति 20 से 30 प्रतिशत कम हो जाएगी.
6. टैंकर द्वारा पानी ढोने में होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च को सरकार बचा सकेगी.
7. इससे पेड़-पौधों को नमी मिलती रहेगी और धरती हरियाली से ढकी रहेगी.
8. रोजगार के नए साधन खुल जाएंगे.
मनोज का मानना है कि अगर यह योजना लागू हो गई तो रांची ही नहीं, पूरे राज्य को जल संकट से बड़ी राहत मिल सकती है.
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