Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने माओवादी संगठन से जुड़े मामले में आरोपी प्रभु प्रसाद साव उर्फ प्रभु साव को जमानत दे दी है. यह आदेश न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया.
मामले के अनुसार, गारु थाना क्षेत्र में वर्ष 2017 में दर्ज केस में आरोप था कि प्रभु साव प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के केंद्रीय समिति सदस्य सुधाकरन का समर्थक था और संगठन के सदस्यों को हथियार, गोला-बारूद व अन्य रसद सामग्री उपलब्ध कराने में मदद करता था.
पुलिस ने उसके बयान के आधार पर जंगल क्षेत्र में छापेमारी कर 7.62 मिमी की 13 जिंदा गोलियां और माओवादी साहित्य बरामद किया था. बाद में इस मामले की जांच केंद्र सरकार के आदेश पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई.
NIA ने जांच के बाद 2022 में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कुल 14 आरोपियों को नामजद किया गया. ट्रायल में 84 गवाहों की सूची दी गई थी, जिसे बाद में घटाकर 51 कर दिया गया.
अपील पर सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से कहा गया कि वह 1 सितंबर 2017 से जेल में है और अब तक अभियोजन पक्ष का एक भी गवाह पेश नहीं किया गया है. इतने लंबे समय तक हिरासत में रहने और ट्रायल जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं होने के कारण उसे जमानत दी जानी चाहिए.
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी करीब साढ़े आठ साल से जेल में है और अभी तक एक भी गवाह का बयान दर्ज नहीं हुआ है. साथ ही 51 गवाहों के परीक्षण में लंबा समय लगने की संभावना है. ऐसी स्थिति में ट्रायल निकट भविष्य में पूरा होना संभव नहीं दिखता.
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने निचली अदालत द्वारा जमानत खारिज करने के आदेश को रद्द करते हुए आरोपी को 10,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी ट्रायल समाप्त होने तक हर सुनवाई पर निचली अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेगा.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.


Leave a Comment