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मौत से पहले माओवादी नेता किसन दा का मिसिर बेसरा को पत्र, सशस्त्र क्रांति अब असंभव

Ranchi : प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य रहे किसन दा ने मौत से पहले मिसिर बेसरा को कथित रुप से एक पत्र लिखा था. पत्र में किसन दा ने लिखा था कि वर्तमान समय में सशस्त्र आंदोलन अब असंभव है. इसलिए संगठन को इस बारे में सोचना चाहिए. पत्र की प्रति लगातार मीडिया के पास है. हालांकि लगातार मीडिया इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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किसन दा का लिखा गया पत्र

 

मिसिर बेसरा भाकपा माओवादी का सेंट्रल कमेटी सदस्य है और वह पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो का सबसे प्रमुख नक्सली है. वह झारखंड के सारंडा समेत ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सक्रिय है. उस पर एक करोड़ का इनाम है. मिसिर बेसरा को भास्कर, सुनिर्मल व सागर के नाम से भी जाना जाता है. किसन दा का पत्र भी सागर के नाम है. उन्होंने मिसिर बेसरा को कॉमरेड सागर नाम से संबोधित किया है.

 

नक्सली नेता किसन दा की मौत 3 अप्रैल की अहले सुबह रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में हो गई थी. सागर को जो पत्र लिखा गया है, वह 20 मार्च 2026 की है. यानी मौत से 13 दिन पहले की. पत्र कंप्यूटर पर टाईप किया गया है. और उस पर माओवादी किसन का अंग्रेजी में हस्ताक्षर भी है.

 

पत्र में किसन ने कहा कि मौजूदा समय में सशस्त्र क्रांति को आगे ले जाना असंभव है. सीआरबी, इआरबी आदि स्थानों पर पार्टी को हुए गंभीर नुकसान से आप वाकिफ होंगे. अभी ऐसे समय में आपके पास बतौर एक सशस्त्र क्रांति को सही मायने में आगे ले जाना संभव है या नहीं, इस पर सोचा जाना चाहिए. यह एक गंभीर मुद्दा है. 

 

पत्र में किसन दा ने अपना मंतव्य देते हुए लिखा है- अभी के समय में सशस्त्र क्रांति को चलाये जाने पर विचार करने का काम जितना देर से होगा, नुकसान की संभावना भी उतनी अधिक होगी. पत्र में उन्होंने संकेत दिया है कि अगर सशस्त्र क्रांति को लेकर विचार किया जाता है, उसे रोका जाता है, तो विपरित पक्ष (पुलिस) द्वारा आप (सागर) पर निर्णायक कार्यवाही कोई नहीं करेगा. 

 

पत्र में माओवादी नेता ने जिक्र किया है कि एक फोन नंबर दे रहा हूं, अगर मुझसे (किसन) से कुछ कहना हो तो कह सकते हैं और मेरे विचार पर जल्द से जल्द प्रतिक्रिया दें.

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