Lagatar Desk : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) की मैट्रिक (10वीं) की परीक्षा 17 फरवरी से शुरू हुई. इस दौरान मसौढ़ी में एक हृदयविदारक घटना घटी, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया.
खरजमा गांव में एक छात्रा ने एग्जाम सेंटर में प्रवेश नहीं करने पर आत्महत्या कर ली. बताया जाता है कि छात्रा सेंटर पर निर्धारित समय से 10 मिनट लेट 9:10 बजे पहुंची थीं. जबकि गेट 9 बजे बंद हो जाता है.
छात्रा के काफी रिक्वेस्ट करने के बावजूद उसे अंदर नहीं जाने दिया गया, जिसके बाद वह निराश होकर लौट गई और ट्रेन से छलांग लगा दी. छात्रा को आनन-फानन में घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
सेंटर में प्रवेश नहीं मिला तो ट्रेन से लगाई छलांग
घटना के संबंध में बताया जाता है कि छात्रा का परीक्षा सेंटर बरनी में पड़ा था. वह महाराजचक स्थित अपने रिश्तेदार के घर ठहरी थी. वहां से एग्जाम सेंटर की दूरी लगभग 6 किलोमीटर थी.
सेंटर में प्रवेश नहीं मिलने के बाद वह नदौल पहुंची और वहां से ट्रेन पर बैठी. इसके बाद तरेगना और मसौढ़ी कोर्ट स्टेशन के बीच उसने चलती ट्रेन से छलांग लगा दी.
इस घटना ने परीक्षा प्रणाली की कठोरता और विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिवार और गांव में शोक का माहौल है. वहीं स्थानीय लोग भी सदमे में हैं.
कदाचारमुक्त परीक्षा कराने के लिए नियम सख्त
बता दें कि इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में करीब 15.12 लाख विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं. राज्यभर में 1699 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. राजधानी पटना में 70 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की जा रही है.
बोर्ड ने शांतिपूर्ण और कदाचार मुक्त परीक्षा कराने के लिए नियम सख्त कर दिए हैं. परीक्षा कक्ष में जूता-मोजा और स्कार्फ पहनकर आने पर रोक है. इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स ले जाने की भी मनाही है.
छात्रों को समय से पहले पहुंचने की भी सख्त हिदायत दी गई है, ताकि सुरक्षा जांच में आसानी हो सके. वहीं सभी केंद्रों पर दंडाधिकारी और और पुलिस बलों की तैनाती की गई है.
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