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आरयू में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर मौलाना आजाद के आदर्शों को किया गया याद

Ranchi : रांची विश्वविद्यालय में आज राष्ट्रीय शिक्षा दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया. यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन सभागार में आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह ने की. इस आयोजन का संयुक्त रूप से आयोजन मास कम्युनिकेशन विभाग और इतिहास विभाग ने आईक्यूएसी के सहयोग से किया.

 

कार्यक्रम के दौरान कुलपति डॉ. सिंह ने भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद को नमन करते हुए कहा कि “जो शिक्षा हमें मानवतावादी बनाए, वही वास्तविक शिक्षा है. उन्होंने कहा कि शिक्षक एक गाइड और मेंटर की भूमिका निभाता है, जो छात्रों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने में सहायता करता है.

 

उन्होंने आगे कहा कि 21वीं सदी में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है. भारत आज विश्व स्तर पर अपनी उपलब्धियों से नई पहचान बना रहा है. झारखंड प्रतिभाशाली युवाओं, खेल और शिक्षा के क्षेत्र में समृद्ध राज्य है. कुलपति ने नई शिक्षा नीति (NEP 2020), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा इंटरडिसिप्लिनरी एजुकेशन की महत्ता पर भी बल दिया.

 

इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुजाता सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि मौलाना आजाद ने राष्ट्र निर्माण की बुनियाद रखी थी और वे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवाद के प्रबल समर्थक थे. उन्होंने मौलाना आजाद के आदर्शों को आज के भारत के लिए प्रेरणास्रोत बताया.

 

विभागाध्यक्ष डॉ पी.के. झा ने स्वागत भाषण देते हुए राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के ऐतिहासिक और शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डाला तथा आजाद के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद किया.

 

मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व सोशल साइंस डीन (सेवानिवृत्त) डॉ आई.के. चौधरी ने मौलाना आजाद के जीवन और उनके विचारों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि मौलाना आजाद भले ही पारंपरिक अंग्रेजी शिक्षा से न जुड़े हों, लेकिन वे आधुनिक शिक्षा के प्रबल समर्थक थे. उन्होंने ‘अल-हिलाल’ नामक अखबार के माध्यम से जन-जागरण का कार्य किया और कई बार रांची भी आए.

 

डॉ राजकुमार सिंह (भौतिकी विभाग एवं आईक्यूएसी सदस्य) ने इस अवसर पर मौलाना आजाद को श्रद्धांजलि दी और नई शिक्षा नीति 2020 के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला.

 

कार्यक्रम का संचालन डॉ कंजीव लोचन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ स्मृति सिंह (डिप्टी डायरेक्टर, वोकेशनल कोर्सेज) ने किया. उन्होंने भारत को पुनः तक्षशिला और नालंदा जैसे गौरवशाली शिक्षाकेंद्रों की दिशा में अग्रसर होने की शुभकामनाएं दीं.

 

इस अवसर पर रांची विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार विनोद नारायण, डॉ अर्चना दूबे (डीन, मानविकी संकाय), डॉ बसंत झा (डायरेक्टर, मास कम्युनिकेशन), डॉ ब्रजेश कुमार, डॉ नीरज, डॉ रिजवान (विभागाध्यक्ष, उर्दू), डॉ अबरार अहमद (गणित विभाग), परीक्षा नियंत्रक संजय कुमार, वरीय पदाधिकारीगण, शिक्षक, शोधार्थी और सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

 

गौरतलब है कि वर्ष 2008 से हर वर्ष 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती को समर्पित है. उच्च शिक्षा विभाग ने 2016 में सभी विश्वविद्यालयों को इस दिवस को अनिवार्य रूप से मनाने का निर्देश दिया था.

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