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रांची: बिरसा मुंडा जेल में खाने के लिए प्रतिमाह 7000 की अवैध वसूली व मोबाइल के इस्तेमाल का आरोप

Ranchi : बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार, होटवार बंद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के एक बंदी प्रभू साहू पर जेल के कैंटीन को अवैध रूप से संचालित करने और आम कैदियों से मनमानी तथा अत्यधिक दरों पर रोजमर्रा की वस्तुओं और भोजन के लिए मोटी रकम वसूलने का गंभीर आरोप लगाया गया है.

 

जेल आईजी को किए गए शिकायत में शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि जेल के अंदर आम कैदियों का मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है, जिसकी तत्काल न्यायिक जांच की आवश्यकता है.

 

वसूली और शोषण के मुख्य आरोप 

शिकायत के अनुसार, प्रभू साहू द्वारा संचालित इस कथित अवैध कैंटीन में वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं, जो आम कैदियों की पहुंच से बाहर हैं. जिनमें प्याज 150 रुपया प्रति किलो, टमाटर 100 रुपया प्रति किलो. इसके अलावा बना हुआ भोजन का प्रति व्यक्ति से 7,000 प्रतिमाह की अवैध वसूली होती है.

 

जेल के खाने को जानबूझकर खराब करने का आरोप 

सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि कैदियों को कैंटीन से महंगा सामान खरीदने के लिए मजबूर करने के लिए प्रभू साहू द्वारा जेल प्रशासन से मिलने वाले सामान्य भोजन को जानबूझकर खराब करवाया जाता है.

 

यदि कोई कैदी कैंटीन से खाना नहीं लेता है और अपना खाना खुद बनाना चाहता है, तो उसे राशन और खाना बनाने की व्यवस्था के लिए प्रभू साहू को प्रतिमाह दस हजार से लेकर 15 हजार तक की राशि देनी पड़ती है.

 

शिकायतकर्ता का दावा है, राशन न देने पर कैदियों को कैंटीन से पांच गुना दाम पर खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है. ताज्जुब होगा कि कैदी रोटी बनाने के लिए सूखी रोटी को जलाते हैं.

 

जेल के भीतर मोबाइल फोन का खुला इस्तेमाल

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रभू साहू कैदियों से मोटी रकम लेकर उन्हें मोबाइल फोन भी उपलब्ध करवाता है. ये मोबाइल फोन कैंटीन के सामान को टेम्पो से बाहर से मंगवाते समय, उसी रास्ते से आसानी से जेल के अंदर मंगवा लिए जाते हैं.

 

प्रभू साहू पर जेल के अंदर से खुलेआम मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने का भी आरोप है. शिकायत में यह भी दोहराया गया है कि जेल मुख्य रूप से न्यायालय के अधीन होता है, न कि सरकार या जेल प्रशासन के.

 

 शिकायतकर्ता ने उच्च अधिकारियों से इस बंदी पर तत्काल जांच कर उचित कार्रवाई करने की अपील की है, ताकि आम कैदियों के साथ न्याय हो सके और कोई भी कैदी प्रताड़ित या शोषित न हो.

 

शिकायतकर्ता ने यह दावा भी किया है कि ऊपर लिखे सभी बातों का उचित प्रमाण उनके पास उपलब्ध है, जिसे वे समय आने पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगे.

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