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मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द, कांग्रेस नेता EC से मिले, रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला निरस्त करने की मांग

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन जी के मामले में  मध्यप्रदेश के रिटर्निंग ऑफिसर (RO) का फैसला कानूनी रूप से गलत है. रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया, वो आधार कानून में Exist ही नहीं करता.
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NewDelhi : कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने आज मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द किये जाने के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त सहित अन्य आयुक्तों से मुलाकात की.

 

प्रतिनिधिमंडल में अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तन्खा, रणदीप सिंह सुरजेवाला, जयराम रमेश, दीपा दासमुंशी,  भूपेश बघेल, मीनाक्षी नटराजन शामिल थे.अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि हमारे प्रतिनिधिमंडल ने  निर्वाचन आयोग के साथ विस्तार से चर्चा की और तथ्य व आंकड़े उनके सामने रखे. 

 

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन जी के मामले में  मध्यप्रदेश के रिटर्निंग ऑफिसर (RO) का फैसला कानूनी रूप से गलत है. रिटर्निंग ऑफिसर ने जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया, वो आधार कानून में Exist ही नहीं करता.

 

उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई क्रिमिनल केस नहीं था, जिसका वे खुलासा कर सकती थीं. कहा कि कोर्ट से एक नोटिस आया था, जिसमें मीनाक्षी  से कहा गया कि आप आकर हमें बताइए कि हम केस का संज्ञान लें या नहीं 

 

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना प्राथमिक चरण में शामिल है. उसमें फैसला किया जाता है कि ये केस आगे चलना चाहिए या नहीं बिना संज्ञान के कोई क्रिमिनल केस खड़ा नहीं होता.

 

सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग के कानून में स्पष्ट रूप से  लिखा है कि आपको सिर्फ वो खुलासा करना है, जिसमें अपराध अगर सिद्ध हो तो सजा दो साल से ज्यादा हो और जिसमें charges फ्रेम हो चुके हों.  इसे देखने का उत्तरदायित्व RO का होता है. 

 

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले में मजिस्ट्रेट ने संज्ञान नहीं लिया है. मीनाक्षी की बात  सुनने के बाद मजिस्ट्रेट संज्ञान लेंगे, उसके बाद जांच होगी और फिर चार्जशीट तैयार होगी और अगर चार्जशीट बनेगी, तब जाकर charges फ्रेम होंगे.

 

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि  इस मामले में आगे के तीन चरण बचे हैं. मजिस्ट्रेट ने संज्ञान तक नहीं लिया है, मगर RO ने मान लिया कि ये एक क्रिमिनल केस लंबित है.

 

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हमने इसके अलावा आयोग के समक्ष  हमने कई अन्य मुद्दे रखे हमने उनसे कहा कि ऐसी गलती के कारण राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता है. यह गणतंत्र के सिद्धांतों के विरुद्ध है. यह संविधान के मूल ढांचे को भी विकृत करता है.

 

अभिषेक मनु सिंघवी के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से कहा कि उनके पास पूरा अधिकार है कि वे RO के फैसले को रिवर्स कर दें या आदेश निरस्त कर दें. कहा कि चुनाव आयोग पहले भी हरियाणा और गुजरात के मामलों में हस्तक्षेप कर चुका है. यह नहीं कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग असहाय है.

 

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