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मिडिल ईस्ट तनाव से शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 1043 अंक टूटा, कच्चे तेल के दाम भी उछले

Lagatar Desk :   मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिख रहा है. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही तेज गिरावट दर्ज की गई.

 

प्री-ओपनिंग सेशन में ही बाजार में भारी दबाव देखा गया. बीएसई सेंसेक्स करीब 7000 अंकों तक लुढ़क गया.  जबकि निफ्टी 50 में करीब 900 अंकों की गिरावट देखी गई.

 

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बाजार खुलते ही भारी गिरावट

बाजार खुलने के बाद भी सेंसेक्स और निफ्टी भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं. सुबह 9:25 बजे सेंसेक्स 1043.10 अंक टूटकर 80,241.13 के स्तर पर ट्रेड करते नजर आए. वहीं निफ्टी 319.80 अंक फिसलकर 24,858.85 पर कारोबार करते दिखे.

 

30 शेयरों वाले सेंसेक्स में सिर्फ एक शेयर हरे निशान पर नजर आ रहा है. जबकि 29 शेयर लाल निशान पर कारोबार कर रहे हैं. Bharat Electronics Limited में करीब 1.99% की बढ़त दर्ज की गई. वहीं InterGlobe Aviation (इंडिगो) के शेयर में करीब 4.23% की सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई.

 

सभी शेयर लाल निशान पर कर रहे ट्रेड

आज के टॉप लूजर की श्रेणी में इंटर ग्लोब एविएशन के अलावा लार्सन, अडानी पोर्ट्स, इटर्नल और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर नजर आ रहे हैं. इसके अलावा ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, रिलायंस, एचसीएल टेक, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा, टीसीएस , एनटीपीसी, सनफार्मा, आईटीसी, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, एचयूएल एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, पावर ग्रिड कॉर्प और कोटक महिंद्रा के शेयर भी गिरावट देखी जा रही है. 

 

कच्चे तेल में उछाल

इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. Brent Crude लगभग 10% चढ़कर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. ऑयल ट्रेडर्स का कहना है कि अगर हालात और बिगड़े तो कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है.

 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना बड़ी चिंता

तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह Strait of Hormuz है. यह दुनिया का अहम समुद्री मार्ग है, जहां से करीब 40% कच्चे तेल की सप्लाई होती है. इस रास्ते पर किसी भी तरह का अवरोध वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है.

 

भारत पर भी पड़ेगा आर्थिक असर

ईरान की चेतावनी के बाद कई टैंकर कंपनियों और तेल ट्रेडिंग हाउस ने इस मार्ग से कच्चे तेल, ईंधन और एलएनजी की शिपमेंट रोक दी है. भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग 50% हिस्सा इसी मार्ग से मंगाता है.

 

साथ ही खाड़ी देशों के साथ व्यापार का बड़ा हिस्सा भी इसी रास्ते से होता है. ऐसे में अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो भारत पर इसका सीधा आर्थिक असर पड़ सकता है.

 

 

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