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मिडिल ईस्ट युद्ध का असर, कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है. क्रूड ऑयल WTI फ्यूचर्स की कीमत 12.2 प्रतिशत बढ़कर 90.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.
 

New Delhi  : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है. क्रूड ऑयल WTI फ्यूचर्स की कीमत 12.2 प्रतिशत बढ़कर 90.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.

 

अप्रैल 2020 के बाद यह एक हफ्ते में सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध खत्म नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है.

 

अगर कच्चे तेल की कीमतों में इसी तरह इजाफा होता रहा तो भारत में एलपीजी घरेलू सिलेंडर की तरह पेट्रोल और डीजल के दाम में भी बढ़ सकते हैं

 

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लंबा चल सकता है युद्ध

बताया जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग किए जाने के बाद बाजार में चिंता बढ़ गई है. आशंका जताई जा रही है कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष लंबा खिंच सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.

 

युद्ध के कारण तेल आपूर्ति बाधित

एसएएमसीओ सिक्योरिटीज के मार्केट पर्सपेक्टिव्स एंड रिसर्च हेड अपूर्वा शेठ ने कहा कि युद्ध का असर ऊर्जा बाजार पर पड़  रहा है. इस संघर्ष के कारण होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है.

 

यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर तेल बाजार पर पड़ सकता है.

 

एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के क्रूड ऑयल रिसर्च हेड जिम बर्कहार्ड के मुताबिक, अगर होरमुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही कम हो जाती है या रुक जाती है, तो यह इतिहास की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति बाधाओं में से एक बन सकती है.

 

बर्कहार्ड ने बताया कि शुरुआत में ईरान ने ऊर्जा से जुड़े ढांचे को निशाना नहीं बनाया था, लेकिन अब सऊदी अरब और कतर में कुछ ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले की खबरें सामने आई हैं. इससे तेल और गैस बाजार में चिंता और बढ़ गई है.

 

60 की जगह अब सिर्फ 5 तेल टैंकर ही गुजरे

एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के आंकड़ों के अनुसार, 1 मार्च को केवल 5 तेल टैंकर ही होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरे. जबकि सामान्य दिनों में यहां से रोज करीब 60 टैंकर गुजरते हैं. यानी तनाव का असर तेल आपूर्ति पर पड़ने लगा है. 

 

 

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