मामले में कोर्ट ने दोपहर 12 बजे DGP और बोकारो SP को वर्चुअल मोड में हाईकोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया. इससे पहले कोर्ट के आदेश के आलोक में DGP हाईकोर्ट में वर्चुअल रूप से उपस्थित हुई थीं.
डीजीपी से कोर्ट ने कहा कि बोकारो पुलिस द्वारा याचिकाकर्ता के रिश्तेदार की पिटाई के संबंध में रिपोर्ट मांगी थी, उसे प्रस्तुत नहीं किया गया. कोर्ट ने उनसे कहा कि एसपी बोकारो ज्यूडिशियरी को चैलेंज कर रहे हैं. कोर्ट की ओर से DGP को बताया गया कि याचिकाकर्ता के वृद्ध रिश्तेदार को पुलिस उठा कर ले गई.
जबकि कोर्ट की ओर से पिछली सुनवाई में कहा गया था कि अगर याचिकाकर्ता को या उनके किसी रिश्तेदारों को बोकारो पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी बोकारो एसपी की होगी. लेकिन एक बार फिर याचिकाकर्ता के रिश्तेदार के साथ घटना हुई.
मामले में कोर्ट ने बोकारो SP को इससे संबंधित मामले में और अनुसंधान के संबंध में स्पष्टीकरण देने को कहा है. कोर्ट ने नाराज होकर DGP से कहा कि बोकारो एसपी के खिलाफ क्रिमिनल अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है.
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में हुई. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और अधिवक्ता शांतनु गुप्ता ने पक्ष रखा.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने DGP को मामले की जानकारी देते हुए बताया था कि याचिकाकर्ता के चाचा ससुर को पिंडराजोड़ा थाना में बुलाकर बेरहमी से पीटा गया, उनके माथा (सिर) और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं.
कोर्ट ने यह भी बताया कि वे रांची में एक निजी क्लीनिक में भर्ती हैं. वह पीड़ित परिवार से हैं. इसके बावजूद भी उनको पीटा गया था. याचिकाकर्ता के रिश्तेदार की पिटाई के संबंध में डीजीपी से रिपोर्ट मांगी थी.
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