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MMCH HIV कांड : सोशल मीडिया की तस्वीर से खुला राज, पहचान नहीं होती तो दबा रह जाता मामला!

Palamu :  मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (MMCH) में HIV संक्रमित प्रसूता के ऑपरेशन मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जानकारी के अनुसार, महिला के HIV पॉजिटिव होने की पहचान अस्पताल की नियमित जांच प्रक्रिया से नहीं, बल्कि ART सेंटर की एक महिला कर्मी द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसूता की तस्वीर देखने के बाद हुई. इस खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. 

 

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महिला की HIV व हेपेटाइटिस बी की रिपोर्ट

 

सूत्रों के अनुसार, प्रसूता की डिलीवरी से पहले अस्पताल में रैपिड टेस्ट किट से HIV जांच की गई थी, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव बताई गई. इसी आधार पर चिकित्सकों ने सिजेरियन ऑपरेशन किया. ऑपरेशन के बाद जब सोशल मीडिया पर प्रसूता और बच्चे की तस्वीर सामने आई तो ART सेंटर से जुड़ी एक महिला कर्मी ने उसकी पहचान की. 

 

इसके बाद पता चला कि महिला पहले से HIV पॉजिटिव है और उसका उपचार भी चल रहा था. इसके साथ ही जानकारी मिली कि उसका पति भी HIV पॉजिटिव है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि तस्वीर के आधार पर पहचान नहीं होती तो क्या अस्पताल प्रशासन को कभी यह पता चल पाता कि प्रसूता HIV संक्रमित थी?

 

इस सवाल ने अस्पताल की स्क्रीनिंग व्यवस्था और जांच प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है. मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि जिस ऑपरेशन थिएटर में संक्रमित महिला का सिजेरियन हुआ, उसी OT में उसके बाद चार अन्य महिलाओं का भी ऑपरेशन किया गया.

 

हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि संक्रमण नियंत्रण के सभी मानक प्रोटोकॉल का पालन किया गया था और एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं. अस्पताल प्रशासन का यह भी दावा है कि नवजात को आवश्यक प्रोफिलैक्सिस दवा दी जा चुकी है और पूरे मामले में राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुरूप कार्रवाई की जा रही है. 

 

जानकारी के अनुसार, प्रसूता की डिलीवरी प्रक्रिया में डॉक्टरों समेत पांच स्वास्थ्यकर्मी प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे. महिला के HIV पॉजिटिव होने की जानकारी सामने आने के बाद इन सभी स्वास्थ्यकर्मियों की ART सेंटर में काउंसलिंग कराई जा रही है और आवश्यक एहतियाती उपाय अपनाए जा रहे हैं.

 

वहीं चर्चा तेज है कि यदि HIV जैसी गंभीर बीमारी की पहचान अस्पताल की जांच में नहीं हो सकी और बाद में सोशल मीडिया के जरिए मामला सामने आया, तो यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है.

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए पलामू के सिविल सर्जन ने एमएमसीएच के अधीक्षक डॉ. अजय कुमार से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.

 

बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम के पीछे जिम्मेदार कौन है. क्या यह जांच प्रक्रिया की तकनीकी खामी थी, सूचना साझा करने में चूक थी या फिर अस्पताल स्तर पर कोई लापरवाही हुई. रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में किसकी जवाबदेही तय होगी और संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी.

 

 

 

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