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मनरेगा कर्मियों का आंदोलन निर्णायक मोड़ पर, 25 को महाधरना का ऐलान

झारखंड में मनरेगा कर्मियों का आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिख रहा है. लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे कर्मियों ने राज्य सरकार पर उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया है.
 
  • महागामा में मंत्री आवास के बाहर राज्यव्यापी महाधरना व फरियाद यात्रा आयोजित की जाएगी

Ranchi : झारखंड में मनरेगा कर्मियों का आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंचता दिख रहा है. लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे कर्मियों ने राज्य सरकार पर उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया है.

 

संघ की ओर से घोषणा की गई है कि 25 अप्रैल को महागामा (गोड्डा) विधानसभा क्षेत्र स्थित मंत्री आवास पर राज्यव्यापी महाधरना और फरियाद यात्रा आयोजित की जाएगी. अगर इसके बाद भी मांगों पर निर्णय नहीं लिया गया, तो 1 मई (मजदूर दिवस) को मुख्यमंत्री आवास के समक्ष ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ कार्यक्रम किया जाएगा.

 

गौरतलब है कि राज्यभर के मनरेगा कर्मी बीते 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इस दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने के लिए कई प्रयास किए. अलग-अलग जिलों में फ्लैशलाइट मार्च निकाला गया, जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपे और विधायकों के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाई.

 

कर्मियों ने प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन को भी पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया. पंचायत स्तर से लेकर जिला परिषद तक जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर समर्थन जताया है.

 

आंदोलन के क्रम में 30 मार्च को रांची स्थित राजभवन के समक्ष धरना दिया गया, जहां राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया. इसके बाद 15 और 16 अप्रैल को ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के आवास के बाहर दो दिवसीय धरना आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मी शामिल हुए.

 

हालांकि, आंदोलनरत कर्मियों का कहना है कि रांची में मौजूद रहने के बावजूद मंत्री स्तर से कोई प्रतिनिधि संवाद के लिए आगे नहीं आया, जिससे उनमें असंतोष और बढ़ा है. कर्मियों की मुख्य मांगों में ग्रेड पे के साथ स्थायी समायोजन, मृत कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी, उचित मुआवजा और सामाजिक सुरक्षा शामिल है.

 

उनका कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बावजूद उन्हें स्थायित्व और सुरक्षा नहीं मिल पा रही है. आंदोलन के एक महीने हो गए हैं. लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई पहल नहीं की गई है. 

 

 

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