- क्यूआर कोड पर काला कपड़ा बांधकर होगा विरोध
- व्यापारियों पर 500 करोड़ का अतिरिक्त बोझ का दावा
- कम मार्जिन में कारोबार करना होगा मुश्किल
- जीरो एमडीआर बहाल करने की मांग
Ranchi News: यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है. ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन ने इसके खिलाफ 2 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ मनाने का ऐलान किया है. इस दिन देश भर के मोबाइल कारोबारी यूपीआई से कोई भी भुगतान नहीं लेंगे.
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गांधी जयंती के दिन व्यापारी अपना शांतिपूर्ण और सांकेतिक विरोध दर्ज कराएंगे. इस दौरान दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड को काले कपड़े से ढका जाएगा. मोबाइल रिटेलर्स का कहना है कि यह आंदोलन डिजिटल इंडिया के खिलाफ बिल्कुल नहीं है. यह सिर्फ व्यापारियों पर थोपे जा रहे अतिरिक्त आर्थिक बोझ के खिलाफ एक सांकेतिक कदम है.
एसोसिएशन के अनुमान के मुताबिक देश भर में करीब डेढ़ लाख मोबाइल रिटेलर्स हैं. नए फ्रेमवर्क में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 फीसदी एमडीआर तय हुआ है. मोबाइल की खरीदारी में बिल की रकम आमतौर पर 2,000 रुपये से ज्यादा होती है. AIMRA का कहना है कि इस नए चार्ज से व्यापारियों पर हर साल लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
एसोसिएशन के झारखंड प्रदेश महासचिव अमृत दास ने कहा कि मोबाइल रिटेल का व्यापार पहले से ही बहुत कम मार्जिन पर चलता है. अगर डिजिटल भुगतान लेने पर व्यापारियों से ही शुल्क कटेगा, तो उनका टिकना काफी मुश्किल हो जाएगा.
संगठन ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है. एसोसिएशन का कहना है कि मोबाइल दुकानदारों ने ही डिजिटल इंडिया को घर-घर पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है. ऐसे में व्यापारियों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए. सरकार को यूपीआई पर पहले की तरह जीरो एमडीआर की व्यवस्था जारी रखनी चाहिए.
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