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वन क्षेत्र से ‘क्रशर मशीन’ व ‘स्टोन माइनिंग’ की दूरी मामले में HC के आदेश में संशोधन

झारखंड हाईकोर्ट ने संरक्षित वन क्षेत्र से क्रेशर मशीन,स्टोन माइनिंग की दूरी मामले में अपने पिछले आदेश में संशोधन किया है. अब नए नियम के तहत ‘स्टोन माइनिंग’ जंगल/वन भूमि से 400 मीटर के अंदर अनुमति नहीं होगी. साथ ही ‘स्टोन क्रशर’ जंगल/वन भूमि से 500 मीटर के अंदर लगाने की अनुमति नहीं होगी.
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  • -स्टोन माइनिंग जंगल/वन भूमि से 400 मीटर के अंदर अनुमति नहीं
  • -स्टोन क्रशर जंगल/वन भूमि से 500 मीटर के अंदर लगने की अनुमति नहीं
  • -कोर्ट ने दिया अंतरिम आदेश

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने संरक्षित वन क्षेत्र से क्रेशर मशीन,स्टोन माइनिंग की दूरी मामले में अपने पिछले आदेश में संशोधन किया है. अब नए नियम के तहत ‘स्टोन माइनिंग’ जंगल/वन भूमि से 400 मीटर के अंदर अनुमति नहीं होगी. साथ ही ‘स्टोन क्रशर’ जंगल/वन भूमि से 500 मीटर के अंदर लगाने की अनुमति नहीं होगी. 


सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में जंगल/वन भूमि से स्टोन माइनिंग और स्टोन क्रशर के लिए अंतरिम आदेश में संशोधन किए जाने का आग्रह किया गया. संशोधन के आग्रह का प्रार्थी आनंद कुमार ने विरोध किया. उनकी ओर से कहा गया कि मामले में सरकार को हस्तक्षेप याचिका (IA) दाखिल करनी थी या रिव्यू दायर किया जाना चाहिए था. लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया. 

 

दरअसल पिछली सुनवाई में कोर्ट ने ‘स्टोन माइनिंग’ जंगल/वन भूमि से 500 मीटर के अंदर लगाने की अनुमति नहीं दी थी. वहीं स्टोन क्रेशर जंगल वन भूमि से 400 मीटर के अंदर लगाने की अनुमति नहीं दी थी. 

 

बता दें, कोर्ट ने अपने आदेश में झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 1 किलोमीटर के भीतर पहले से दी गई अनुमति का सर्वे करने को कहा है. सर्वे का रिपोर्ट 1 जून तक कोर्ट में पेश करनी होगी. राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य के लिए अभी भी 1 किलोमीटर बफर ज़ोन लागू रहेगा. अब इस माले की सुनवाई 18 जून को होगी. तब तक यही अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी. 

 

यहां उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने पहले आदेश दिया था कि संरक्षित जंगलों से 1 किलोमीटर के भीतर ‘स्टोन माइनिंग’ और ‘स्टोन क्रशर’ की अनुमति नहीं दी जाएगी. वहीं राज्य सरकार का तर्क था कि 1 किलोमीटर का नियम केवल राष्ट्रीय उद्यान (National Parks) और वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries) पर लागू होता है. साधारण/संरक्षित वनों (Protected Forests) पर नहीं. केंद्र के 2025 गाइडलाइन के अनुसार 200 मीटर दूरी भी पर्याप्त है.

 

कोर्ट ने पाया था कि 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर करना बिना ठोस कारण के किया गया. यह निर्णय बिना उचित विचार पर्यावरण के लिए खतरनाक है. पर्यावरण को नुकसान अक्सर अपरिवर्तनीय होता है. इसलिए सतर्कता सिद्धांत लागू किया गया.

 

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