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झारखंड में 10 से ज्यादा आपराधिक गैंग सक्रिय, एक पर दबाव बनते ही दूसरा देता चुनौती

झारखंड में संगठित अपराध का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है. राज्य के कई जिलों में 10 से अधिक आपराधिक गिरोह सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनकी वजह से आम लोग, कारोबारी और ठेकेदार दहशत में हैं. रंगदारी, फायरिंग, धमकी और हत्या की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
 

Ranchi: झारखंड में संगठित अपराध का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है. राज्य के कई जिलों में 10 से अधिक आपराधिक गिरोह सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनकी वजह से आम लोग, कारोबारी और ठेकेदार दहशत में हैं. रंगदारी, फायरिंग, धमकी और हत्या की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थिति यह है कि एक गिरोह पर पुलिस दबाव बनाती है, तो दूसरा गिरोह वारदात को अंजाम देकर चुनौती दे देता है.

 

जानकारी के अनुसार अमन साव गैंग वर्तमान में सबसे ज्यादा सक्रिय माना जा रहा है. यह गिरोह चतरा, लातेहार और कोयलांचल क्षेत्र में रंगदारी और धमकी के मामलों को लेकर चर्चा में है. वहीं धनबाद क्षेत्र में प्रिंस खान गैंग कारोबारियों से रंगदारी मांगने और फायरिंग की घटनाओं को लेकर कुख्यात बताया जा रहा है. पुलिस कार्रवाई के बावजूद इस गिरोह की ओर से लगातार चुनौती मिलने की बात सामने आती रही है.

 

कोयलांचल और आसपास के इलाकों में अमन श्रीवास्तव गैंग की सक्रियता भी चर्चा में है. कारोबारियों और ठेकेदारों के बीच इस गिरोह का नाम दहशत पैदा करता है. वहीं सुजीत सिन्हा गिरोह झारखंड के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय बताया जा रहा है और कई मामलों में इसका नाम सामने आता रहा है.

 

इसके अलावा पांडेय गिरोह भी रंगदारी के लिए सक्रिय माना जा रहा है. जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में अखिलेश सिंह गैंग की गतिविधियां पहले से ही चर्चा में रही हैं. वहीं विकास तिवारी और राहुल सिंह से जुड़े गिरोहों की गतिविधियों की भी चर्चा अलग-अलग जिलों में होती रही है, जिससे कारोबारी वर्ग में भय का माहौल बना हुआ है.

 

सूत्रों के अनुसार इन संगठित गिरोहों का नेटवर्क कई जिलों में फैला हुआ है. रंगदारी के लिए फोन कॉल, धमकी भरे संदेश, फायरिंग और ठेकेदारों को निशाना बनाने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं. इससे आम लोग और व्यवसायी पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगा रहे हैं. कई कारोबारियों ने सुरक्षा बढ़ाने और कार्रवाई तेज करने की मांग की है.

 

हालांकि पुलिस अधिकारी स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए कार्रवाई का दावा कर रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही घटनाओं ने विधि-व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है. एक गिरोह पर दबाव बनते ही दूसरा गिरोह सक्रिय हो जाता है. पुलिस अब इन गिरोहों के नेटवर्क को तोड़ने और सक्रिय अपराधियों पर शिकंजा कसने की रणनीति पर काम कर रही है.

 

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