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बोले मोहन भागवत, भारत ने आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुन लिया है, किसी टैरिफ के दबाव में नहीं है

भागवत ने एक अहम बात कही.उन्होंने कहा कि भारत के साथ अगर कुछ अच्छा या खराब होता है, तो इसके लिए हिंदुओं से सवाल किया जायेगा. इसे समझाते हुए कहा,  भारत महज एक भौगोलिक क्षेत्र यानी ज्योग्राफिकल इलाका नहीं है, बल्कि यह एक विचार, संस्कृति और चरित्र का नाम है.
 

 Mumbai :  भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार कर रहा है, लेकिन किसी देश के दबाव में नहीं आया हैं. चाहे कोई देश कितना भी टैरिफ लगाये या दबाव डाले, भारत ने आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुन लिया है. भारत को उसी पर चलना चाहिए. RSS चीफ मोहन भागवत महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित हिंदू सम्मेलन में बोल रहे थे.

 

 
इस क्रम में श्री भागवत ने आम जन से आत्मनिर्भर होने और स्वदेशी सामानों ता इस्तेमाल करने की अपील की. उन्होंने सलाह दी कि जहां तक हो सके, देश में निर्मित सामान ही खरीदें. कहा कि अगर कोई सामान भारत में नहीं बन सकता,  तभी बाहर से लाया जाना चाहिए.

 

इस अवसर पर मोहन भागवत ने इस बात को स्पष्ट  किया कि कुछ देश ग्लोबलाइजेशन को महज ग्लोबल मार्केट की तरह देखते हैं, लेकिन भारत एक ग्लोबल फैमिली के नजरिए से देखता है.  

 

भागवत ने एक अहम बात कही.उन्होंने कहा कि भारत के साथ अगर कुछ अच्छा या खराब होता है, तो इसके लिए हिंदुओं से सवाल किया जायेगा. इसे समझाते हुए कहा,  भारत महज एक भौगोलिक क्षेत्र यानी ज्योग्राफिकल इलाका नहीं है, बल्कि यह एक विचार, संस्कृति और चरित्र का नाम है.


 
भागवत ने हिंदू शब्द की व्याख्या करते हुए कहा,  सदियों से हमले. कठिनाइयों और तबाही झेलने के बावजूद भारत की परंपराएं और मूल मूल्य जीवित रहे हैं, जिन्होंने अपने अंदर अच्छे संस्कार, धर्म और मूल्य बचाकर रखे, वही हिंदू कहलाये. ऐसे लोगों की भूमि को भारत कहा गया. हिंदू समाज में एकता सिर्फ संघ का लक्ष्य नहीं है, बल्कि पूरे हिंदू समुदाय की जिम्मेदारी है.  

 

RSS पहल करता है, लेकिन असली काम समाज को मिलकर करना होगा.आरएसएस प्रमुख के अनुसार यदि भारत के लोग अच्छे, ईमानदार और मजबूत चरित्र वाले होंगे,  तो वही गुण दुनिया के सामने देश की पहचान बनेंगे. उन्होंने कहा कि आज पूरी विश्व भारत की ओर उम्मीद की नजर से देखता है.

 

लेकिन भारत तभी सही मायने में योगदान दे पायेगा, जब वह ताकतवर और प्रभावशाली होगा. मोहन भागवत ने ताकत का अर्थ समझाते हुए कहा, इसका संबंध सिर्फ हथियारों से नहीं होता, बल्कि समझ, नैतिकता, ज्ञान और सही सिद्धांत भी ताकत का हिस्सा हैं.  

 

 

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