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मोहन भागवत ने कहा, संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए, पावर नहीं चाहिए, बताया, क्या चाहिए

भारतीय होना, केवल नागरिक होना नहीं है, यह एक स्वभाव का होना है. यह जोड़ने वाला स्वभाव है, हमें इसे अनुशासनबद्ध हो कर बड़ा करना होगा.  श्री भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक सरकार से कोई धन लिए बिना और समाज के सहयोग से अपने स्वयं के धन से 1.3 लाख से अधिक सेवा गतिविधियां चला रहे हैं. कहा कि हिंदू संज्ञा नहीं, विशेषण है. भारत में रहने वाले सभी हिंदू ही हैं.
 

New Delhi :   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आज शनिवार को मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में मुंबई व्याख्यानमाला के नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि  संघ कोई पैरामिलिट्री संगठन नहीं है और न ही पॉलिटिकल पार्टी है. कहा कि संघ से जुड़े लोग भले ही पॉलिटिक्स में एक्टिव हों, लेकिन संगठन खुद पॉलिटिकल नहीं है.  

 

 

उन्होंने कहा कि बताया कि भारतीय होना, केवल नागरिक होना नहीं है, यह एक स्वभाव का होना है. यह जोड़ने वाला स्वभाव है, हमें इसे अनुशासनबद्ध हो कर बड़ा करना होगा.  श्री भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक सरकार से कोई धन लिए बिना और समाज के सहयोग से अपने स्वयं के धन से 1.3 लाख से अधिक सेवा गतिविधियां चला रहे हैं. कहा कि हिंदू संज्ञा नहीं, विशेषण है. भारत में रहने वाले सभी हिंदू ही हैं.

 

 

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि संघ का किसी संगठन से कोई प्रतियोगिता नहीं है. संघ को किसी भी प्रकार की लोकप्रियता नहीं चाहिए. मोहन भागवत ने संघ की विशिष्टता बताते हुए कहै कि संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम किसी और संगठन का नहीं है. अब हमें यह प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है.

 


मोहन भागवत ने कहा कि संघ किसी दूसरी संस्था के साथ प्रतिस्पर्धा करने नहीं निकला है, न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है.  हमारा काम किसी के विरोध में नहीं है. इसी क्रम में कहा कि संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए, पावर नहीं चाहिए. संघ बस इतना चाहता है कि  जितने भी अच्छे काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जायें. उन्हें करने के लिए संघ है. 
 

 

मोहन भागवत ने डॉ हेडगेवार का जिक्र करते हुए कहा, उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी दो बातों को कभी नहीं छोड़ा. पहला पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना.  दूसरा यह कि  देश हित में जो कुछ चल रहा था उसमें सक्रिय रूप से भाग लेना. संघ ने पहले से तय कर लिया है कि सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ और कोई दूसरा काम नहीं करेगा.  

 

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