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किसके पास सिंडिकेट का रिमोट कंट्रोल? विनय चौबे और विनय सिंह के जेल जाने के बाद भी जारी रहा पैसों का लेनदेन

Ranchi :  झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की विस्तृत जांच अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. जांच की सुइयां अब केवल छिटपुट धन-लेनदेन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे 'केंद्रीय कमांड' की ओर संकेत कर रही हैं, जिसने पूरे तंत्र को सुनियोजित तरीके से संचालित किया.

 

इस संगठित नेटवर्क के केंद्र में जेल में बंद निलंबित वरिष्ठ IAS अधिकारी विनय चौबे की संभावित संलिप्तता की गहराई से पड़ताल की जा रही है. ACB की जांच में अब तक सामने आए मोहम्मद इरफान इकबाल, शिपिज त्रिवेदी, प्रियंका त्रिवेदी और एस.एन. त्रिवेदी जैसे नाम केवल स्वतंत्र इकाइयां नहीं, बल्कि एक वृहद और सुविचारित ढांचे का हिस्सा प्रतीत होते हैं.

 

एजेंसी के मुताबिक, इन व्यक्तियों और उनके खातों के बीच हुए करोड़ों के लेन-देन सामान्य बिल्कुल नहीं थे, बल्कि इसके पीछे एक 'कंट्रोल मैकेनिज्म' कार्य कर रहा था, जो धन के स्रोत से लेकर उसके अंतिम गंतव्य तक के मार्ग को गाइड कर रहा था.

 

आपको यह जानकर काफी हैरानी होगी कि इस केस के प्रमुख चेहरों की गिरफ्तारी और एसीबी की कड़ी दबिश के बावजूद इस सिंडिकेट का संचालन और पैसों का लेनदेन बाधित नहीं हुआ. यह इस बात की प्रबल संभावना को जन्म देता है कि नेटवर्क को किसी वरिष्ठ स्तर से निरंतर आश्वासन प्राप्त था.

 

एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कानून के शिकंजे के बाद भी यह निर्भीकता किसके संरक्षण के कारण बनी रही. जांच में एक और गंभीर तथ्य यह उजागर हुआ है कि अधिकारी से जुड़े पारिवारिक सदस्य और निकट संबंधियों का इस्तेमाल धन को घुमाने और उसे छिपाने के लिए एक टूल के रूप में किया गया. जिसके तहत अवैध रूप से अर्जित धन को कई स्तरों पर घुमाकर अंततः 'वैध पारिवारिक आय' के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया.

 

एसीबी इस बिंदु पर साक्ष्य जुटा रहा है कि इस पूरे तंत्र का 'रिमोट कंट्रोल' किसके हाथ में था और किसके निर्देश पर यह बिसात बिछाई गई थी. अगर जांच की दिशा इसी गति से आगे बढ़ती है, तो आने वाले दिनों में नौकरशाही के गलियारों में बड़े धमाके की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

 

 

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