Simdega News: मोबाइल देखने को लेकर मां ने अपने टीनेज बेटे को डांट लगाई, जिससे नाराज होकर उसने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी. घटना सिमडेगा के जलडेगा थाना क्षेत्र की है.
इसे भी पढ़ें:
जानकारी के अनुसार, जलडेगा थाना क्षेत्र का रहने वाला किशोर गुजरात में अपने माता पिता के साथ रहकर दसवीं कक्षा में पढ़ता था. वह अक्सर मोबाइल देखता था. जिसके लिए उसकी मां उसे डांट कर पढ़ने के लिए बोलती थी.
जानकारी के मुताबिक उसके माता-पिता एक कार्यक्रम से देर रात करीब एक बजे अपने कमरे में गए तो उन्होंने अपने बेटे को रस्सी के सहारे झूलते हुए मृत पाया. घटना की सूचना मिलने के बाद गुजरात पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम करा शव परिजनों को सौंप दिया. जिसके बाद परिजन गुजरात से उसका शव लेकर अपने गांव जलडेगा पहुंचे.
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि किशोरों और युवाओं में बढ़ती तत्काल प्रतिक्रिया और गुस्से की प्रवृत्ति को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है. पढ़ाई, मोबाइल, सोशल मीडिया, दोस्तों से विवाद, अभिभावकों की रोक-टोक या छोटी-सी असहमति कई बार किशोरों के मन में बेहद तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है.
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था भावनात्मक बदलावों का दौर होता है. ऐसे समय में बच्चों को डांटने के बजाय उनकी बात सुनना, उनकी भावनाओं को समझना और शांतिपूर्वक समझाना अधिक प्रभावी हो सकता है. वहीं किशोरों को भी यह समझना जरूरी है कि गुस्से में लिया गया कोई भी बड़ा फैसला जिंदगी को हमेशा के लिए प्रभावित कर सकता है.
अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें और उनके व्यवहार में अचानक बदलाव, अत्यधिक चिड़चिड़ापन या अलग-थलग रहने जैसी बातों को गंभीरता से लें. वहीं बच्चों और युवाओं को गुस्सा आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ समय रुककर किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करनी चाहिए.
जिंदगी में समस्या कितनी भी बड़ी क्यों न लगे, उसका समाधान बातचीत और मदद से तलाशा जा सकता है. किसी भी संकट की स्थिति में अकेले रहने के बजाय तुरंत माता-पिता, शिक्षक, मित्र या किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति से बात करना जरूरी है.
Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.

