Ranchi : सांसद ने राज्यपाल से नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश सिंह की फिर शिकायत की है. इसमें VC द्वारा दुर्भावना से एक सिंह कॉलेज के विज्ञान संकाय का एफिलियेशन रद्द करने की अनुशंसा करने का आरोप लगाया है.
सासंद बीडी राम द्वारा राज्यपाल को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि एके सिंह कॉलेज के कला और वाणिज्य संकाय को 2013 से स्थायी संबद्धता है. लेकिन विज्ञान संकाय में अस्थायी संबद्धता है. सांसद जनवरी 2024 से इस कॉलेज के अध्यक्ष भी हैं. अध्यक्ष बनने के बाद उनकी कोशिशों से NACC द्वारा कॉलेज को मई 2025 में ग्रेड-सी दिया गया. यानी कॉलेज लगातार प्रगति पर है.
लेकिन VC दिनेश सिंह द्वारा एके सिंह कॉलेज के साथ लगातार दुर्भावना से प्रेरित होकर व्यवहार किया जा रहा है. वर्ष 2013 से कॉलेज के विज्ञान संकाय को हमेशा अस्थायी संबंधन मिलता रहा है. जबकि पहले संसाधन कम थे.
पत्र में कहा गया है कि उनके अध्यक्षीय कार्यकाल में पुस्तकालय और प्रयोगशाना दोनों ही समृद्ध हुए हैं. शिक्षक, निर्धारित मानक से कुछ कम हैं. लेकिन दूसरे सरकारी और संबद्ध डिग्री कॉलेजों से ज्यादा है. इसके बावजूद VC ने कॉलेज के संबंधन के अवधि विस्तार को सिंडिकेट से रद्द करा दिया.
सबसे दुख की बात यह है कि इससे संबंधित पत्र एके सिंह कॉलेज के नाम पर जारी तो हुआ. लेकिन किसी भी माध्यम से कॉलेज के प्राचार्य को नहीं मिला. हालांकि विश्वविद्यालय द्वारा पहली अप्रैल 2026 को ई-मेल के सहारे कॉलेज को इसकी सूचना दिये जाने का दावा किया जा रहा है.
सिर्फ इतना ही नहीं 12 जून 2026 को एडमिशन के सिलसिले में हुई मिटिंग में भी प्राचार्य को कॉलेज के विज्ञान संकाय का संबंधन अस्वीकृत किया जाने की सूचना नहीं दी गयी.
VC ने कॉलेज के पूर्व प्राचार्य सूर्यमणि सिंह को Ph.D की डिग्री नहीं होने के कारण तत्काल पद से हटाने का निर्देश दिया था. कॉलेज के शासी निकाय ने उन्हें पद से हटा दिया. हालांकि दूसरे संबद्ध डिग्री कॉलेजों में अब भी ऐसे प्रभारी प्राचार्य कार्यरत हैं, जिनके पास Ph.D की उपाधि नहीं है.
सूर्यमणी सिंह के बाद राम सुभग सिंह को एके सिंह कॉलेज के प्राचार्य पद का पदभार दिया गया. लेकिन VC ने अपने चहेते आनंद कुमार को प्राचार्य बनाने का निर्देश दिया. नियम विरूद्ध होने की वजह से शासी निकाय ने कुलपति के आदेश को मानने से इनकार कर दिया.
इसके बाद कुपलति ने शासी निकाय को ही भंग कर दिया. राज्यपाल के हस्तक्षेप के बाद शासी निकाय को बहाल किया गया.
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