Ranchi : ग्रांट थोरंटोन भारत एलएलपी द्वारा जीआईजेड के सहयोग से आज रांची में एमएसएमई सपोर्ट एंड इंगेजमेंट फ्रेमवर्क पर राज्य स्तरीय अंतरिम वैलिडेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला में विभिन्न संगठनों, एजेंसियों एवं स्टेकहोल्डर्स ने भाग लेकर अध्ययन के प्रारंभिक निष्कर्षों पर अपने सुझाव साझा किए.
कार्यक्रम में फेडरेशन ऑफ झारखंड चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा बतौर पैनलिस्ट शामिल हुए. उन्होंने कहा कि राज्य की एमएसएमई इकाइयां इंडस्ट्री-रेडी मैनपावर की कमी से जूझ रही हैं, विशेषकर माइनिंग सपोर्ट सर्विसेज, फैब्रिकेशन, मैकेनिकल मेंटेनेंस और इलेक्ट्रिकल ट्रेड्स में कुशल श्रमिकों का अभाव है.
उन्होंने बताया कि राज्य में प्रशिक्षित युवा उपलब्ध होने के बावजूद प्रैक्टिकल और शॉप-फ्लोर आधारित स्किल्स की कमी के कारण एमएसएमई को दोबारा प्रशिक्षण पर समय और संसाधन खर्च करने पड़ते हैं. छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए यह अतिरिक्त बोझ चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.
चैम्बर अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि झारखंड को क्लस्टर-आधारित स्किलिंग अप्रोच अपनानी चाहिए, जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला स्तर की औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए जाएं, न कि एक समान राज्य-स्तरीय पाठ्यक्रम पर आधारित हों.
उन्होंने उद्योगों की पाठ्यक्रम निर्माण, अप्रेंटिसशिप योजनाओं और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग फ्रेमवर्क में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया.
उन्होंने कहा कि एमएसएमई अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों में भाग लेने को तैयार हैं, बशर्ते अनुपालन (कम्प्लायंस) प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए और संस्थागत सहयोग प्रदान किया जाए.
प्रशिक्षित मानव संसाधन के अन्य राज्यों में पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि माइग्रेशन की समस्या को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाकर ही नियंत्रित किया जा सकता है.
इस पहल का उद्देश्य राज्य में एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ एमएसएमई इकोसिस्टम का निर्माण करना है. कार्यक्रम में चैम्बर के स्किल डेवलपमेंट उप समिति के चेयरमैन आलोक कुमार भी उपस्थित थे.
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