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बैल के फेर में हत्या, HC ने उम्रकैद को 5 साल किया, SC ने दो साल में बदला

सुप्रीम कोर्ट ने बैल के झगड़े में गोड्डा जिले में वर्ष 2009 में हुए हत्या के एक मामले में ट्रायल कोर्ट से 4 अभियुक्तों को मिली आजीवन कारावास की सजा को 2 साल (जितनी सजा उन्होंने जेल में काटी है) में बदल दिया.
 

Ranchi: सुप्रीम कोर्ट ने बैल के झगड़े में गोड्डा जिले में वर्ष 2009 में हुए हत्या के एक मामले में ट्रायल कोर्ट से 4 अभियुक्तों को मिली आजीवन कारावास की सजा को 2 साल (जितनी सजा उन्होंने जेल में काटी है) में बदल दिया. 

 

साथ की उनके 2 साल की सजा काटने को देखते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया. इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 4 अभियुक्तों की सजा के खिलाफ अपील पर फैसला सुनाते हुए इसे गैर-इरादतन हत्या मानते हुए उन्हें  5 साल कठोर कारावास और 5,000 रुपए जुर्माना लगाया था.

 

मामले में हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अभियुक्तों कपिल देव मंडल एवं अन्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की गई थी. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की थी. अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुचित्रा पांडे ने पक्ष रखा. 

 

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि घटना बहुत मामूली विवाद से शुरू हुई थी. यह पूर्व-नियोजित हत्या नहीं थी. आरोपियों ने औसतन लगभग 2 साल जेल काट ली थी.

 

घटना बहुत पुरानी (2009) है और लंबे समय तक आरोपी जमानत पर रहे. सुप्रीम कोर्ट ने चारों अभियुक्तों के दोष सिद्धि (Section 304 Part II IPC) को बरकरार रखा, लेकिन सजा घटाकर "जितनी जेल काटी है उतनी ही" (period already undergone) कर दी. कोर्ट ने मामले के चारों अभियुक्तों की अपील आंशिक रूप से मंजूर कर लिया. 

 

क्या था मामला

दरअसल, यह घटना 16 अप्रैल 2009 की है. सीता मंडल (अब मृतक) अपने घर पर मुरही (लाई) बना रहा था. आरोपियों में से एक का बैल वहां आकर भूसा खाने लगा. युवक ने बैल को भगाया, जिससे विवाद शुरू हुआ.

 

झगड़े के दौरान दिलीप मंडल ने सीता मंडल के सिर पर लाठी से वार किया. सिर पर लगी चोट से सीता की मौत हो गई. गोड्डा की निचली अदालत ने सभी चार आरोपियों को धारा 302 IPC (हत्या) में आजीवन कारावास और 10,000 जुर्माना भी लगाया था.

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