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नामकुम CO का कारनामा : 'मुर्दा' को बना दिया जमीन का मालिक!

नामकुम अंचल में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हुई झड़प और जमीन पर दावेदारी को लेकर अंचल में दिए गए आवेदनों के आधार पर यह मामला उजागर हुआ है. पीड़ित पक्ष की ओर से इस मामले को लेकर वरीय पदाधिकारी के पास आवेदन दिया गया है.
 
नामकुम अंचल कार्यालय
  • म्यूटेशन न करने की अर्जी देते रहे जमीन मालिक, सीओ ने कर दिया.
  • क्या कब्र से निकलकर मुर्दे ने किया म्यूटेशन के दस्तावेज में हस्ताक्षर

Kuber Singh

 

क्या आपने कभी किसी मुर्दे को कब्र से निकलकर अपने दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते हुए सुना है. बिल्कुल नहीं सुना होगा, लेकिन राजधानी रांची में यह हुआ है. जब एक मुर्दा कब्र से निकलकर सरकारी कार्यालय पहुंचा और उसने वहां पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए. यह मामला नामकुम अंचल का है.

 

क्या है मामला

जानकारी के मुताबिक, नामकुम अंचल में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच हुई झड़प और जमीन पर दावेदारी को लेकर अंचल में दिए गए आवेदनों के आधार पर यह मामला उजागर हुआ है. पीड़ित पक्ष की ओर से इस मामले को लेकर वरीय पदाधिकारी के पास आवेदन दिया गया है. 

 

मामले में एलआरडीसी कोर्ट में म्यूटेशन रद्द करने के लिए सुशीला देवी ने अपील की थी. एलआरडीसी ने सीओ कार्यालय से रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट में बताया गया कि जमीन पर सुशीला देवी का दखल-कब्जा है. सुनवाई के बाद एक अपील स्वीकार किया गया. जबकि दूसरी अपील को खारिज कर दिया गया. पीड़िता ने कहा था कि मृत व्यक्ति के नाम पर जो म्यूटेशन हुआ है, वह रद्द हो.

 

जबकि दूसरे पक्ष ने एलआरडीसी कोर्ट को बताया है कि उस जमीन को मेरे पूर्वजों ने खरीदा है. मामले में अंचल कार्यालय की ओर से दिए गए आवेदन के आधार पर तीन बार म्यूटेशन आवेदन को अस्वीकृत किया गया.

 

चौथी बार में ऑफिस के बाबू व कर्मचारी द्वारा इस मृत व्यक्ति के नाम पर जमीन म्यूटेशन कर दिया गया. जबकि उस व्यक्ति की मौत एक साल पहले ही हो चुकी है. उसकी मौत की पुष्टि नगर निगम पहले ही कर चुकी है.

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सवालों के घेरे में अंचल कार्यालय

मृत व्यक्ति को जमीन का मालिक बनाकर और मालिकाना हक दस्तावेज में दिखाकर अंचल कार्यालय सवालों के घेरे में आ गई है. सवाल उठ रहा है कि आखिर अंचल और उसके पदाधिकारी ने इस तरह का कृत्य कैसे कर दिया. 

 

मामला एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के हेथू का है. वहां की रहनेवाली सुशीला देवी का कहना है कि वहां उसका एक एकड़ 39 डिसिमल जमीन है. महिला सुशीला देवी ने गांव के ही भुवनेश्वर साहू, कृष्णा साहू, दिलीप साहू पर इसे हड़पने का आरोप लगाया है. इस मामले में पीड़ित ने थाना, एसएसपी कार्यालय, डीसी और एलआरडीसी कार्यालय में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है. 

 

इस मामले में पीड़ित पक्ष ने सीओ ऑफिस में आवेदन देकर कहा है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु 31 अगस्त 2024 को हो गई है. उसी व्यक्ति के नाम से 2025 में कैसे म्यूटेशन हो गया? बताया जाता है कि जिस शपथ पत्र के आधार पर जमीन का दाखिल खारिज किया गया है, उसमें शपथकर्ता का हस्ताक्षर नहीं है. 

 

तीन बार खारिज, चौथे बार नामांतरण स्वीकार करने पर उठ रहे सवाल

अंचल कार्यालय द्वारा किसी म्यूटेशन आवेदन को एक बार खारिज किया गया है, तो क्या दोबारा उस भूमि के आवेदक के दूसरे आवेदन पर दाखिल खारिज हो सकती है. जबकि अंचल कार्यालय इसी भूमि के तीन बार नामांतरण आवेदन खारिज कर चुका है. चौथी बार में नामांतरण स्वीकार करने के लिए ऐसी कौन सी स्थिति उत्पन्न हुई की उसे स्वीकार कर लिया गया.

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