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नासिक TCS धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामले ने तूल पकड़ा, मलेशिया लिंक सामने आया

खबर है कि अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आने से पुलिस और SIT के कान खड़े हो गये हैं.  मामले की तह में जायें तो इसी साल फरवरी  में पुलिस के समक्ष एक शिकायत आयी थी. कंपनी में काम करने वाली एक महिला के व्यवहार में धार्मिक बदलाव आने की शिकायत की गयी थी. वह  हिंदू महिला रमज़ान के रोजे रख रही थी.
 

 Mumbai : महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) के बीपीओ कैंपस  धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामला तूल पकड़ता जा रहा है. जांच एजेंसियों को मलेशिया लिंक का पता चला है. शुरुआती तौर पर जांच एजेंसियां इसे सिर्फ कार्यस्थल पर उत्पीड़न का मामला मान रही थी. 

 

पुलिस ने एसीपी स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में 12 सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया है. अब तक आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन और तौसीफ अत्तार,अश्विन चैनानी नाम के आरोपियों  को गिरफ्तार किया जा चुका है.

 

 खबर है कि अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आने से पुलिस और SIT के कान खड़े हो गये हैं.  मामले की तह में जायें तो इसी साल फरवरी  में पुलिस के समक्ष एक शिकायत आयी थी. कंपनी में काम करने वाली एक महिला के व्यवहार में धार्मिक बदलाव आने की शिकायत की गयी थी. वह  हिंदू महिला रमज़ान के रोजे रख रही थी.  

 

पुलिस को मामला संदिग्ध लगा तो उसने कंपनी में गुप्त ऑपरेशन शुरू किया. जानकारी के अनुसार महिला पुलिसकर्मियों को हाउसकीपिंग स्टाफ बनाकर अंदर भेजा गया, उन्होंने कई अहम जानकारियां जुटाई गयी. इसी दौरान  में  मलेशिया कनेक्शन सामने आया. जांच के क्रम में एक WhatsApp चैट सामने आया.

 

इस चैट्स में मलेशिया से जुड़ा इरमान नाम के एक संदिग्ध व्यक्ति का जिक्र मिला. आरोप है कि इस शख्स को वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित कर्मचारियों से मिलवाया जाता था.  SIT के सूत्रों के अनुसार WhatsApp चैट, कॉल रिकॉर्ड और वीडियो कॉल लॉग खंगाले जा रहे है. SIT इस बात की छानबीन कर रही है कि क्या  इस कथित नेटवर्क को निर्देश  दे रहा था.

 

विदेशी फंडिंग के एंगल को भी इसी कड़ी से जोड़ा जा रहा है.सूत्रों के अनुसार जांच में अब तक 12 पीड़ितों की पहचान हो चुकी है. इस मामले में 9 FIR दर्ज की गयी हैं.  FIR में  यौन उत्पीड़न, शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने सहित अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं.

 

जांचकर्ताओं के अनुसार इस केस में आरोपी कर्मचारियों के बीच एक WhatsApp ग्रुप के जरिए बातचीत होने की  बात उजागर हुई है. इस ग्रुप में कर्मचारियों को टारगेट करने की रणनीति तैयार की जाती थी. हालांकि कई चैट डिलीट की जा चुकी है. फोरेंसिक टीम उन्हें रिकवर करने में जुटी है.

 

FIR के अनुसार आरोपियों ने 18 से 25 साल की उम्र की महिला कर्मचारियों के साथ छेड़छाड़ की और उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया. घटनाएं 2022 से लेकर 2026 तक लगातार चलती रहीं.  बता दें कि पहली FIR में दानिश शेख, तौसीफ अत्तर और निदा खान पर गंभीर आरोप लगाये गये हैं. इन पर आरोप है कि ये लोग हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते थे.

 

 आरोप है कि एक महिला को शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाये गये. अन्य FIR में रजा मेमन और शाहरुख कुरैशी पर अश्लील व्यवहार करने और मानसिक उत्पीड़न के आरोप हैं. पीड़िताओ का आरोप है कि कंपनी में शिकायत की गयी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं का गयी.

 

अन्य FIR में  शफी शेख और तौसीफ अत्तर नाम के व्य़क्तियों पर महिला कर्मचारियों पर अश्लील इशारे करने, धार्मिक भावनाओं को आहत करने के भी आरोप हैं. कर्मचारियों पर नमाज पढ़ने और मांस खाने का दबाव बनाते हुए धर्म परिवर्तन के लिए विवश किया गया.  

 

पीड़ितों का कहना है कि आरोपी उन पर लगातार नजर रखते थे. आरोपी निदा खान की भूमिका बेहद अहम करार दी जा रही है. वह पीड़ित महिलाओं पर धार्मिक दबाव बनाती थी और आरोपियों का साथ देती थी. पुलिस के अनुसार वह WhatsApp ग्रुप का हिस्सा थी, जहां कर्मचारियों को टारगेट करने की रणनीति बनाई जाती थी.

 

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