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संसद का विशेष सत्र 16 से, केंद्र सरकार ने कहा, परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होगा

New Delhi :  परिसीमन (डेलिमिटेशन) के बाद  राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का अनुपात बिल्कुल उसी तरह का ही रहेगा, जैसा आज है. दक्षिणी राज्यों को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होगा. मौजूदा अनुपात को बनाये रखा जायेगा. बता दें कि केंद्र सरकार 16 अप्रैल से शुरू हो रहे विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन पर बिल लाने वाली है. 

 

इसी संबंध में केंद्र सरकार ने दक्षिणी राज्यों की चिंता दूर करते हुए यह बात कही है. सूत्रों के अनुसार लोकसभा की कुल सीटें लगभग 50 प्रतिशत बढ़ाकर 850 कर दी जाएंगी. इस क्रम में हर राज्य की सीटें उसी अनुपात में 50 प्रतिशत बढ़ाई जायेगी.

 

परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों द्वारा चिंता जताये जाने को लेकर केंद्र सरकार ने यह स्पष्टीकरण सामने आया है.  दरअसल दक्षिण भारत के राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश के नेता आशंका जता रहे हैं  कि जनसंख्या के आधार पर नये सिरे से सीटें बढ़ाये जाने से उनकी लोकसभा में हिस्सेदारी कम हो जायेगी.

 

इसी को देखते हुए सरकार ने उनकी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की है.  सरकारी सूत्रों ने यह बात साफ कर दी है कि परिसीमन का उद्देश्य किसी राज्य को लाभ या नुकसान पहुंचाना नहीं है. परिसीमन का उद्देश्य लोकसभा की क्षमता बढ़ाते हुए लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाना है.  

 

कांग्रेस ने 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र से पहले अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आज शीर्ष नेताओं की अहम बैठक बुलाई है. बैठक में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा की जायेगी.  खबर है कि कांग्रेस ने तय किया कि संसद में इन दोनों मुद्दों पर सरकार को घेरा जायेगा.  कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की मंशा ठीक नहीं है.  इससे लोकतंत्र को खतरा हो सकता है. 

 

 
  

 
 
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