New Delhi : तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से बचने के लिए एक सप्ताह की दी गयी ट्रांजिट बेल पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. इस फैसले से पवन खेड़ा की मुसीबत फिर बढ़ गयी है.
SC stays Telangana HC order granting one-week transit anticipatory bail to Congress leader Pawan Khera in case registered in Assam.
— Press Trust of India (@PTI_News) April 15, 2026
SC issues notice to Congress leader Pawan Khera on Assam govt's plea against HC order granting him one-week transit anticipatory bail.
This is… pic.twitter.com/QrOvoqqoI6
दरअसल असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दी गयी राहत के खिलाफ अपील की थी. इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को नोटिस जारी कर उन्हें तीन सप्ताह का समय दिया गया है कि इस मामले पर उनका क्या कहना है.
साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर उन्हें अग्रिम जमानत चाहिए, तो उन्हें असम हाईकोर्ट जाना होगा.असम सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में सवाल उठाया कि जब केस असम में दर्ज हुआ है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट ने इसमें क्यों दखल दिया और जमानत दे दी.
तुषार मेहता ने कहा कि कायदे से पवन खेड़ा को असम हाईकोर्ट जाना चाहिए था. तर्क रखा कि श्री खेड़ा और उनकी पत्नी दिल्ली में रहते हैं, उनके पास दिल्ली के ही आईडी प्रूफ हैं. किसी राज्य में संपत्ति होने से उस राज्य की अदालत को क्या हक कि वह जमानत दे.
तुषार मेहता की बात पर जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने माना कि कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से मामला असम की अदालत का है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पवन खेड़ा को राहत पाने के लिए असम की कोर्ट में गुहार लगानी पड़ेगी.
मामला यह है कि पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी पर विदेशी पासपोर्ट और विदेश में काला धन रखने के गंभीर आरोप लगाये थे. इसे लेकर असम में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी थी.
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