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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम- प्रो सरोज शर्मा

Ranchi : राजधानी रांची में आयोजित बिहार-झारखंड एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की उपस्थिति में रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सरोज शर्मा ने शिक्षा, नवाचार, कौशल विकास और युवाओं की बदलती भूमिका पर अपने विचार रखे.
 
  • एजुकेशन कॉन्क्लेव में इंटर-डिसिप्लिनरी शिक्षा और स्किल आधारित सीख पर जोर

Ranchi : राजधानी रांची में आयोजित बिहार-झारखंड एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की उपस्थिति में रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सरोज शर्मा ने शिक्षा, नवाचार, कौशल विकास और युवाओं की बदलती भूमिका पर अपने विचार रखे.

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने बताया कि रांची विश्वविद्यालय इस नीति के प्रावधानों को लागू करने में अग्रणी संस्थानों में शामिल है और पहले बैच के छात्रों के परिणाम आने के बाद इसके सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे.

 

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल वैश्विक शिक्षा प्रदान करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि समाज और जमीन से जुड़ाव का भी माध्यम है. नई शिक्षा नीति की सबसे बड़ी विशेषता इंटर-डिसिप्लिनरी शिक्षा प्रणाली है, जिसके तहत अब छात्र अपनी मुख्य पढ़ाई के साथ अन्य विषयों का भी अध्ययन कर सकते हैं. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अब रसायन विज्ञान का छात्र हिंदी जैसे विषय भी पढ़ सकता है.

 

कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCF) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क को लागू किया जा रहा है. साथ ही छात्रों के लिए किसी एक कौशल आधारित विषय का अध्ययन भी आवश्यक किया गया है, जिससे उन्हें रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में मदद मिलेगी.

 

प्रो. शर्मा ने शिक्षा में सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में शिक्षा समाज से जुड़ी व्यवस्था थी और आज भी अनुभवी लोगों की भागीदारी शिक्षा को अधिक व्यावहारिक बना सकती है. उन्होंने कहा कि एक अनुभवी किसान भी कृषि महाविद्यालय के छात्रों का प्रभावी मार्गदर्शक बन सकता है.

 

उन्होंने केंद्र सरकार की ‘विद्यांजलि’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से क्षेत्र के विशेषज्ञ और सेवानिवृत्त लोग विश्वविद्यालयों में आकर छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और ज्ञान दे सकते हैं. इससे इंडस्ट्री, समुदाय और शैक्षणिक संस्थानों के बीच की दूरी कम होगी और शिक्षा अधिक उपयोगी बन सकेगी.

 

कॉन्क्लेव में झारखंड सरकार के शिक्षा मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, सरला बिरला विश्वविद्यालय के कुलपति सी. जगन्नाथन समेत कई शिक्षाविद और गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

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