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Ranchi News: राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने की RU की पीएचडी, डी.लिट व डी.एससी विनियमावली की सराहना

रांची विश्वविद्यालय में शुक्रवार को पीएचडी विनियमावली तथा डी.लिट./डी.एससी. उपाधि विनियमावली के प्रारूप पर विचार-विमर्श और उसे अंतिम रूप देने के लिए विशेषज्ञ समिति की बैठक आयोजित की गई.
 
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Ranchi: रांची विश्वविद्यालय में शुक्रवार को पीएचडी विनियमावली तथा डी.लिट./डी.एससी. उपाधि विनियमावली के प्रारूप पर विचार-विमर्श और उसे अंतिम रूप देने के लिए विशेषज्ञ समिति की बैठक आयोजित की गई. बैठक का उद्देश्य विश्वविद्यालय की शोध संबंधी विनियमावली को यूजीसी मानकों के अनुरूप अंतिम रूप देना था.

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बैठक की अध्यक्षता सीपीआरएचई, एनआईईपीए, नई दिल्ली के प्रोफेसर एवं निदेशक प्रो. पी. के. मिश्रा ने की, जबकि सह-अध्यक्ष के रूप में इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रो. गुलशन धमीजा मौजूद रहे. बैठक में केंद्रीय विश्वविद्यालय, राजस्थान के प्रो. बी. सी. महापात्र, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय की प्रो. सीमा धवन, रांची विश्वविद्यालय के प्रो. सुदेश कुमार साहू, डॉ. मोहम्मद परवेज़ हसन तथा कुलसचिव डॉ. राजकुमार शर्मा ने भाग लिया.

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बैठक के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा तैयार पीएचडी तथा डी.लिट./डी.एससी. विनियमावलियों का विस्तृत परीक्षण किया गया. विशेषज्ञों ने कहा कि इन विनियमावलियों में यूजीसी पीएचडी विनियम-2022 के सभी आवश्यक प्रावधानों को समुचित रूप से शामिल किया गया है. उन्होंने इसे शोध की गुणवत्ता, पारदर्शिता और शैक्षणिक उत्कृष्टता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया.

 

विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राज कुमार सिंह ने पावर-पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विनियमावलियों के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी. उन्होंने शोध प्रवेश प्रक्रिया, शोध पर्यवेक्षण, कोर्स वर्क, प्रगति मूल्यांकन, शोध प्रबंध के मूल्यांकन, वाइवा-वोसे, शोध नैतिकता तथा डी.लिट./डी.एससी. उपाधियों से जुड़े विशेष प्रावधानों को विस्तार से प्रस्तुत किया. प्रस्तुतीकरण के बाद विशेषज्ञों ने अपने सुझाव और टिप्पणियां भी साझा कीं.

 

विशेषज्ञों ने विशेष रूप से इस बात की सराहना की कि रांची विश्वविद्यालय ने डी.लिट. और डी.एससी. जैसी उच्चतम शोध उपाधियों के लिए अलग एवं स्वतंत्र विनियमावली तैयार की है. उनके अनुसार यह पहल चयन प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और उच्च शैक्षणिक मानकों के अनुरूप बनाएगी.

 

बैठक में बाह्य विशेषज्ञों ने विनियमावलियों को और अधिक प्रभावी एवं व्यवहारिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए. विश्वविद्यालय ने उपयुक्त सुझावों को अंतिम प्रारूप में शामिल करने का निर्णय लिया.

 

बैठक के अंत में विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और रचनात्मक सुझावों के लिए आभार व्यक्त किया गया. विश्वविद्यालय ने विश्वास जताया कि अंतिम रूप से तैयार की गई नई विनियमावलियां उच्च गुणवत्ता वाले शोध को बढ़ावा देने, अनुसंधान संस्कृति को मजबूत करने और राष्ट्रीय शैक्षणिक मानकों के अनुरूप शोध व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.

 

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