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DSPMU में जनजातीय विकास पर राष्ट्रीय सेमिनार का समापन, 100 शोध पत्र प्रस्तुत

DSPMU के मानवशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “जनजातीय विकास हेतु सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील रणनीतिक संचार” का दूसरा दिन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया. इस सम्मेलन का आयोजन ‘एसोसिएशन ऑफ डेवलपमेंट कम्युनिकेशन’ (ADC), अहमदाबाद और ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय’ (IGRMS), भोपाल के सहयोग से किया गया.
 

Ranchi: DSPMU के मानवशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “जनजातीय विकास हेतु सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील रणनीतिक संचार” का दूसरा दिन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया. इस सम्मेलन का आयोजन ‘एसोसिएशन ऑफ डेवलपमेंट कम्युनिकेशन’ (ADC), अहमदाबाद और ‘इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय’ (IGRMS), भोपाल के सहयोग से किया गया.

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दूसरे दिन आयोजित सत्रों में देशभर से आए शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास में संचार की भूमिका पर गहन विमर्श किया. कुल 10 तकनीकी सत्रों में लगभग 100 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.

 

सत्रों के दौरान जनजातीय पहचान, स्वदेशी ज्ञान, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल समावेशन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषयों पर विशेष चर्चा हुई. ‘संचार नृविज्ञान’ और ‘डिजिटल समावेशन’ जैसे विशिष्ट सत्रों में इस बात पर बल दिया गया कि आधुनिक तकनीक को जनजातीय संस्कृति के साथ जोड़कर ही वास्तविक और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सकता है.

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सम्मेलन का उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, पर्यावरण और शासन जैसे क्षेत्रों में सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील संचार रणनीतियों के माध्यम से जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने के प्रभावी उपायों की तलाश करना था. इस मंच पर मानवशास्त्रियों, संचार विशेषज्ञों, विकास क्षेत्र के पेशेवरों, सरकारी अधिकारियों तथा NGO और CSR प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव और शोध साझा किए.

 

कार्यक्रम में डॉ. अरबिंद सिन्हा (अध्यक्ष, ADC), डॉ. एन.के. अम्बष्ठ (पूर्व अध्यक्ष, NIOS), प्रो. ए.सी. सिन्हा, प्रो. वी.एस. सहाय, डॉ. वी.पी. शर्मा, प्रो. रवींद्र के. वेमुला, प्रो. ओंकार प्रसाद और प्रो. एस.एन. मुंडा सहित कई प्रतिष्ठित वक्ताओं की उपस्थिति रही.

 

आयोजन का नेतृत्व संयोजक प्रो. अजीत कुमार सिंह एवं आयोजन सचिव डॉ. एस.एम. अब्बास ने किया. आयोजन में डॉ. अभय सागर मिंज और डॉ. शशि किरण का विशेष योगदान रहा. विभाग के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों में- विवेक कुमार भगत, सच्चिदानंद बराइक, आजाद कुमार महतो, सचिन भगत, डॉ. शालिनी मिंज, अर्चना टोप्पो, विकास पुर्ती, दीक्षा सिंह, सेलिस्टिन सोरेंग, अन्ना कुजूर और सुमंत कुमार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

 

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