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विश्वविद्यालयों में शिकायतों पर अब नहीं चलेगी लापरवाही, 15 दिन से 3 महीने तक में करना होगा निपटारा

Ranchi News: छात्रों की शैक्षणिक, प्रशासनिक, प्रवेश और अन्य शिकायतों के निपटारे के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर छात्र शिकायत निवारण समिति (SGRC) गठित की जाएगी. समिति को शिकायत मिलने के बाद 15 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें देनी होंगी. SGRC के दायरे में छात्रसंघ चुनाव से संबंधित विवाद और चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतें भी आएंगी.
 
फाइल फोटो

Ranchi News: झारखंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की शिकायतों के निपटारे के लिए अब अधिक जवाबदेह व्यवस्था होगी. झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के अध्याय-VIII में शिकायत निवारण को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. इसके तहत शिकायतों के समाधान के लिए अलग-अलग समितियों और न्यायाधिकरण की व्यवस्था की गई है.

 

छात्रों की शिकायतों के लिए SGRC

छात्रों की शैक्षणिक, प्रशासनिक, प्रवेश और अन्य शिकायतों के निपटारे के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर छात्र शिकायत निवारण समिति (SGRC) गठित की जाएगी. समिति को शिकायत मिलने के बाद 15 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें देनी होंगी.

 

SGRC के दायरे में छात्रसंघ चुनाव से संबंधित विवाद और चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ी शिकायतें भी आएंगी. इसके अलावा, यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार छात्रों की शिकायतों के निवारण के लिए लोकपाल (Ombudsperson) की नियुक्ति का भी प्रावधान है.

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कर्मचारियों की शिकायतों के लिए अलग समिति

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सेवा संबंधी शिकायतों के लिए कर्मचारी शिकायत निवारण समिति (EGRC) बनाई जाएगी. इसमें वेतन, सेवा शर्त, प्रोन्नति और अन्य सेवा विवादों की सुनवाई की जाएगी.

 

इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश या कम से कम 10 वर्ष के अनुभव वाले मान्यता प्राप्त अधिवक्ता करेंगे. समिति को शिकायत दर्ज होने की तारीख से तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर निर्णय देना होगा.

 

फैसले के खिलाफ 30 दिन में अपील

यदि किसी कर्मचारी को बर्खास्तगी, निलंबन, पदावनति या कर्मचारी शिकायत निवारण समिति के निर्णय से आपत्ति है, तो वह 30 दिनों के भीतर कर्मचारी शिकायत निवारण न्यायाधिकरण (EGRT) में अपील कर सकेगा.

न्यायाधिकरण की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उस पद की योग्यता रखने वाले व्यक्ति द्वारा की जाएगी. अधिनियम में न्यायाधिकरण के निर्णय को अंतिम और संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी बनाने का प्रावधान है.

 

आदेश नहीं मानने पर जुर्माना

न्यायाधिकरण के आदेशों का समय पर पालन नहीं करने पर विश्वविद्यालय या कॉलेज के खिलाफ आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है.

पहली बार उल्लंघन: 10 हजार से 1 लाख रुपये तक जुर्माना.


दूसरे और बाद के उल्लंघन: 50 हजार से 5 लाख रुपये तक जुर्माना.


आदेश का पालन होने तक: लगातार उल्लंघन की अवधि में 2 हजार रुपये प्रतिदिन अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है.

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