Ranchi News : माध्यमिक सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया में निजी विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता अब जांच के दायरे में आ गई है. शिक्षा विभाग ने नियुक्ति के लिए अनुशंसित 877 अभ्यर्थियों में शामिल 218 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच कराने का निर्णय लिया है. ये अभ्यर्थी पांच निजी विश्वविद्यालयों से उत्तीर्ण बताए जा रहे हैं.
विभाग को इन अभ्यर्थियों की डिग्री की मान्यता और वैधता को लेकर शिकायतें मिली थीं. इसके बाद शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह ने प्रमाणपत्रों की बारीकी से जांच कराने का निर्देश दिया है. विभाग यह भी देखेगा कि संबंधित विश्वविद्यालय और पाठ्यक्रम निर्धारित मानकों के अनुरूप मान्यता प्राप्त हैं या नहीं.
बताया गया कि अनुशंसित अभ्यर्थियों में कई ऐसे हैं, जिन्होंने झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों के निजी विश्वविद्यालयों से बीएड, एमएड समेत अन्य संबंधित डिग्रियां हासिल की हैं. इनमें झारखंड के राधागोविंद विश्वविद्यालय, वाईबीएन विश्वविद्यालय और सिक्किम के एक विश्वविद्यालय के साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के निजी विश्वविद्यालय शामिल हैं.
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इससे पहले 33 महिला पर्यवेक्षिकाओं की नियुक्ति में अनियमितता सामने आने के बाद भी विभागीय स्तर पर जांच कराई गई थी. जांच के दौरान निजी विश्वविद्यालयों से डिग्री हासिल करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या अधिक पाई गई. इसके बाद माध्यमिक सहायक आचार्य नियुक्ति में भी ऐसे अभ्यर्थियों की डिग्री की जांच कराने का फैसला लिया गया.
राज्य में माध्यमिक सहायक आचार्यों के करीब 1373 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है. इनमें से 877 अभ्यर्थियों के नाम की अनुशंसा जेएसएससी की ओर से की गई है. अब इन 877 में शामिल निजी विश्वविद्यालयों से पास 218 अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच के बाद ही उनकी नियुक्ति को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी.
जांच में डिग्री या प्रमाणपत्र में गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी प्रभावित हो सकती है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रमाणपत्रों की वैधता की पुष्टि होने के बाद ही नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.
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