Ranchi News : झारखंड में उच्च शिक्षा को बेहतर बनाने और कॉलेजों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए ‘झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026’ में संबद्धता और मान्यता को लेकर कई सख्त नियम बनाए गए हैं. नए कानून में यह साफ किया गया है कि कॉलेजों को सिर्फ संबद्धता लेना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन्हें लगातार तय मानकों का पालन भी करना होगा.
अधिनियम के अध्याय-IX में कॉलेजों को संबद्धता देने, उसे जारी रखने, निरीक्षण करने, प्रबंधन में बदलाव और जरूरत पड़ने पर कॉलेज बंद करने तक के प्रावधान किए गए हैं. (रांची से जुड़ी खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...)
कॉलेजों के लिए क्या-क्या अनिवार्य होगा?
- - पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी : नए नियमों के तहत मान्यता के लिए किसी कॉलेज के पास पर्याप्त जमीन और भवन होना जरूरी होगा. इसके अलावा प्रयोगशाला, पुस्तकालय, पर्याप्त किताबें, स्वास्थ्य केंद्र, छात्रावास, व्यायामशाला और सुरक्षा के लिए CCTV जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होंगी. इन सुविधाओं के रखरखाव के लिए कॉलेज के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन भी होने चाहिए.
- - तय सीमा से ज्यादा दाखिला नहीं : कॉलेज विश्वविद्यालय, UGC और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित क्षमता से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन नहीं कर सकेंगे. शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की संख्या और योग्यता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप रखनी होगी.
- - शिक्षक-कर्मचारियों की सेवाएं परीक्षा में भी जरूरी : कॉलेज के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को विश्वविद्यालय की परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में आवश्यकतानुसार अपनी सेवाएं देनी होंगी।
- - बिना अनुमति कॉलेज का स्थान नहीं बदलेगा : कोई कॉलेज विश्वविद्यालय और राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना अपना स्थान नहीं बदल सकेगा. कॉलेज के प्रबंधन का हस्तांतरण भी बिना अनुमति नहीं किया जा सकेगा.
- - मनमाने तरीके से कॉलेज बंद नहीं होगा : कॉलेजों को बंद करने को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं. कोई कॉलेज बिना पूर्व अनुमति के बंद नहीं किया जा सकेगा. अगर किसी कॉलेज की संबद्धता खत्म होती है या उसे बंद किया जाता है, तो स्थिति के अनुसार कॉलेज प्रबंधन पर छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों को हुए नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है.
- - संबद्ध महाविद्यालय बोर्ड करेगा निगरानी : संबद्ध कॉलेजों की व्यवस्था पर नजर रखने के लिए ‘संबद्ध महाविद्यालय बोर्ड’ का प्रावधान किया गया है. यह बोर्ड कॉलेजों की शैक्षणिक गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा और निरीक्षण करेगा. इससे कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर नियमित निगरानी रखने की व्यवस्था मजबूत हो सकती है.
- - हर पांच साल में बनेगी Perspective Plan : राज्य के उन इलाकों में उच्च शिक्षा की सुविधा पहुंचाने पर भी जोर दिया गया है, जहां कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी है. इसके लिए हर पांच साल में Perspective Plan (परिप्रेक्ष्य योजना) तैयार की जाएगी. इसका उद्देश्य राज्य में कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों का संतुलित तरीके से विकास और वितरण करना होगा.
- - बेहतर कॉलेजों को मिलेगी स्वायत्तता : जो कॉलेज पढ़ाई और शैक्षणिक प्रदर्शन के मामले में बेहतर काम करेंगे, उन्हें UGC के नियमों के तहत स्वायत्त महाविद्यालय या सशक्त स्वायत्त महाविद्यालय का दर्जा मिल सकता है.
- - स्वायत्त कॉलेजों को अधिक अधिकार : स्वायत्तता मिलने के बाद पात्र कॉलेजों को पाठ्यक्रम तैयार करने, पढ़ाने के तरीके तय करने और परीक्षाएं आयोजित करने में पहले की तुलना में अधिक स्वतंत्रता मिल सकेगी. हालांकि यह स्वतंत्रता UGC के निर्धारित नियमों के तहत ही होगी.
कॉलेजों की मनमानी पर रोक लगाने में मिलेगी मदद
नए अधिनियम का सबसे बड़ा असर संबद्ध कॉलेजों की रोजमर्रा की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है. अब केवल संबद्धता हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं होगा. कॉलेजों को लगातार अपने भवन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, शिक्षक-कर्मचारी, छात्र क्षमता, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को तय मानकों के अनुसार बनाए रखना होगा.
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