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न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ममदानी ने उमर खालिद को पत्र लिखा, आठ अमेरिकी सांसदों ने रिहा करने की मांग की

New Delhi :  न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी सहित आठ अमेरिकी आठ सांसद चाहते हैं कि दिल्ली दंगों के आरोपी JNU के पूर्व छात्र उमर खालिद को रिहा कर दिया जाये. वह 2020 से ही गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम  (यूएपीए) के तहत जेल में बंद है.

 

 
हालांकि उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट नें दिसंबर में बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दी थी. जमानत की अवधि समाप्त होने के बाद वे फिर से जेल पहुंच गये हैं.


जोहरान ममदानी ने दिसंबर (2025) में अमेरिका गये उमर खालिद के माता-पिता को अपने हाथ से लिखा एक पत्र सौपा है. उमर की पार्टनर बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने कल गुरुवार को ममदानी के शपथग्रहण के दिन यह पत्र एक्स पर साझा किया है.  


ममदानी ने उमर खालिद को प्रेषित पत्र में लिखा, प्रिय उमर, मैं अक्सर आपकी उन बातों को याद करता हूं, जिनमें आपने कड़वाहट को खुद पर हावी न होने देने और हालात को बड़े नजरिए से देखने की बात कही थी. आपके माता-पिता से मिलकर खुशी हुई. हम सभी आपके बारे में सोच रहे हैं.


बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने कहा कि उमर खालिद के माता-पिता साहिबा खानम और सैयद कासिम रसूल इलियास दिसंबर में अमेरिका की यात्रा पर गये थे. वे बड़ी बेटी से मिलने वहां गये थे. इसी क्रम में उनकी मुलाकात जोहरान ममदानी से हुई, जहां ममदानी ने यह पत्र उन्हें सौंपा.  


 खबर है कि आठ अमेरिकी सांसदों ने भी उमर खालिद की लंबी हिरासत को लेकर भारत सरकार पर निशाना साधा है. इन सबने वॉशिंगटन स्थित भारतीय राजदूत को पत्र लिखा है. पत्र में उमर खालिद को जमानत पर रिहा करने और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है.


पत्र में अमेरिकी सांसद जिम मैकगवर्न, जेमी रस्किन, क्रिस वैन हॉलन, पीटर वेल्च, प्रमिला जयपाल, जैन शाकोव्स्की, राशिदा तलैब और लॉयड डॉगेट ने हस्ताक्षर किये हैं. 


सांसदों का कहना है कि हम भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों के प्रति सम्मान रखते हैं. हालांकि उन्होंने पूछा है कि यूएपीए के तहत उमर खालिद को पांच साल से अधिक समय तक बिना ट्रायल हिरासत में रखना अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों के अनुरूप कैसे हो सकता है. सवाल किया कि गिरफ्तारी के पांच साल बाद भी मुकदमे शुरू क्यों नहीं हुआ.
 
 
जिम मैकगवर्न, जिनके नेतृत्व में पत्र लिखा गया, उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे वॉशिंगटन में उमर खालिद के माता-पिता से मिले थे. उन्होंने बताया कि वह और उनके सहयोगी  अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप उमर खालिद को जमानत देने और ट्रायल शुरू करने की मांग कर रहे हैं.


जान लें कि  इससे पूर्व मैकगवर्न ने अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा को पत्र लिख कर  दिल्ली दंगों के आरोप में जेल में बंद आरोपी लोगों की लंबी प्री-ट्रायल हिरासत पर चिंता जताई थी.  


मैकगवर्न के अनुसार  मानवाधिकार संगठनों की स्वतंत्र जांच में उमर खालिद को किसी भी आतंकी गतिविधि में शामिल होने के ठोस सबूत नहीं मिले हैं.

 

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नागरिक और राजनीतिक अधिकारों की संधि (ICCPR) के तहत भारत की जिम्मेदारी है कि वह आरोपियों के मुकदमे का निबटारा करे या उन्हें रिहा करे.  दोष साबित होने तक उन्हें निर्दोष माने.

  

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