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NGT ने आदेश सुरक्षित रखने के बाद भारत सरकार को अतिरिक्त हलफनामा दायर करने को कहा

  • वन मंत्रालय ने वन मंजूरी (FC) की शर्त संख्या 9 के उल्लंघन के संबंध में NGT में अपना रुख स्पष्ट नहीं किया था
  • NTPC द्वारा वन विभाग से मिलीभगत कर EC के आधार पर FC शर्त उल्लंघन करने के मामले में चल रही सुनवाई

Ranchi: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की कोलकाता पीठ ने हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित NTPC की पकरी बरवाडीह कोयला परियोजना में वन मंजूरी (FC) की शर्तों के उल्लंघन से जुड़ी याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ईश्वर सिंह की अदालत ने मामले में विगत आठ जनवरी को सुनवाई पूरी होने करते हुए आदेश सुरक्षित रखने के बाद अब भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (MoEF&CC) को एक अतिरिक्त हलफनामा दायर करने का आदेश दिया है. 

 

अदालत ने स्पष्ट किया कि वन मंजूरी की शर्त संख्या 9 के अनुपालन के संबंध में मंत्रालय का रुख जानना अनिवार्य है. NGT के मुख्य ब्रांच नई दिल्ली में एक्टिविस्ट मंटू सोनी उर्फ शनिकांत द्वारा दायर याचिका के बाद दिल्ली से NGT के कोलकाता ब्रांच में मामले को स्थानांतरित किए जाने के बाद सुनवाई चल रही है. 

 

वन मंत्रालय ने वन मंजूरी (FC) की शर्त संख्या 9 के उल्लंघन में रुख स्पष्ट नहीं किया था

 

NGT कोलकाता के जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ ईश्वर सिंह की अदालत में विगत आठ जनवरी को वादी मंटू सोनी उर्फ शनिकांत, एनटीपीसी,राज्य सरकार व उपायुक्त हजारीबाग द्वारा पक्ष रखते हुए बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री/तथ्यों का अवलोकन करते हुए अपने आदेश में कहा कि "15.07.2025 के अपने जवाब में वन मंत्रालय (भारत सरकार) MoEF&CC ने शर्त संख्या 9 का उल्लेख किया है.

 

वन मंजूरी की शर्त संख्या 9 के संबंध में यह प्रस्तुत किया गया कि पर्यावरण और वन मंजूरी मंत्रालय (MoEF&CC) ने दिनांक 14.07.2025 के पत्र के माध्यम से झारखंड सरकार से मूल आवेदन में लगाए गए आरोपों पर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी थी और अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का अधिकार सुरक्षित रखा था. पर्यावरण और वन मंजूरी की शर्तों के अनुपालन न होने की स्थिति में कार्रवाई करने के लिए MoEF&CC अंतिम प्राधिकारी है. 

 

हालांकि MoEF&CC ने अतिरिक्त हलफनामा दाखिल नहीं किया है और वन मंजूरी की शर्त संख्या 9 के उल्लंघन के संबंध में अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है. यद्यपि हमने दिनांक 08.01.2026 के आदेश द्वारा दलीलें सुनीं और निर्णय/आदेश सुरक्षित रखा था, लेकिन अभिलेख में मौजूद सामग्री का अध्ययन करने पर हमारा यह सुविचारित मत है कि मामले में शामिल महत्वपूर्ण पर्यावरणीय प्रश्नों का निर्णय करने और उसके आधार पर कोई निर्णय/आदेश पारित करने से पहले, वन मंजूरी की शर्त संख्या 9 के अनुपालन न करने के आरोप के संबंध में MoEF&CC को अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करने का अवसर दिया जाना चाहिए.

 

EC शर्त के आधार पर FC उल्लंघन का बचाव DFO व NTPC ने किया था

 

NGT ने NTPC के साथ पीसीसीएफ झारखंड, पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उपायुक्त हजारीबाग को प्रतिवादी बनाया था.


सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि NTPC और राज्य वन विभाग की तरफ से हजारीबाग DFO मौन प्रकाश ने पर्यावरण मंजूरी (EC) में हुए संशोधनों को आधार बनाकर FC शर्तों के उल्लंघन का बचाव किया था. जबकि याचिकाकर्ता के अनुसार, EC की शर्तें केवल प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित थीं और उनका वन मंजूरी की शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है. 


गौरतलब है कि हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल के डीएफओ पर कोर्ट में भ्रामक तथ्य पेश करने के आरोपों की विभागीय जांच भी प्रक्रियाधीन है. हालांकि पूर्व में वन विभाग के दो सदस्यीय जांच कमिटी और भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय रांची द्वारा FC शर्त के उल्लंघन की पुष्टि की जा चुकी है.  

 

मानव जीवन और वन्य जीवों को हो रहे नुकसान को लेकर दायर किया गया था याचिका

 

भारत सरकार के फॉरेस्ट क्लीयरेंस में यह स्पष्ट शर्त है कि एनटीपीसी को कन्वेयर सिस्टम से रेलवे साइडिंग तक कोयला ट्रांसपोर्टेशन करना है. परंतु एनटीपीसी के द्वारा पर्यावरणीय शर्तों में संशोधन करवाकर सड़क मार्ग से कोयला ट्रांसपोर्टेशन करवाया जा रहा था और वन विभाग चुप बैठा था. जिसके कारण वन्य जीवों का संतुलन बिगड़ गया था और अब तक दर्जनों व्यक्तियों की मृत्यु सड़क दुर्घटना में हो चुकी थी.

 

जिसको लेकर एक्टिविस्ट शनि कांत उर्फ मंटू सोनी ने वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए एनजीटी में याचिका दायर किया था  दायर याचिका में कहा गया था कि फॉरेस्ट क्लियरेंस का शर्तों का उल्लंघन वन विभाग के अधिकारी एनटीपीसी सांठगांठ से करवा रहे हैं और भारत सरकार और राज्य सरकार के कई पत्रों का जवाब पीसीसीएफ के द्वारा नहीं दिया जा रहा है. फॉरेस्ट क्लियरेंस का उल्लंघन वन विभाग के अधिकारी करवा रहे हैं. जिसके बाद एनजीटी के प्रिंसिपल बेंच नई दिल्ली द्वारा पीसीसीएफ झारखंड, पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उपायुक्त हजारीबाग को प्रतिवादी बनाया था.

 

 

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