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चाईबासा-झींकपानी से गुजरने वाली NH-75 (E) का होगा मरम्मतीकरण कार्य, ग्रामीणों में खुशी की लहर

चाईबासा-झींकपानी से गुजर रही जर्जर राष्ट्रीय राजमार्ग-75 (ई) के उड़ती धूल समेत विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे ग्रामीणों को जल्द मुक्ति मिलने वाली है. मंत्री दीपक बिरुवा के सकारात्मक पहल पर उक्त सड़क की सुदृढ़ीकरण कार्य शुरू करने के लिए विभागीय आदेश मिल गई है.
 

Chaibasa: चाईबासा-झींकपानी से गुजर रही जर्जर राष्ट्रीय राजमार्ग-75 (ई) के उड़ती धूल समेत विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे ग्रामीणों को जल्द मुक्ति मिलने वाली है. मंत्री दीपक बिरुवा के सकारात्मक पहल पर उक्त सड़क की सुदृढ़ीकरण कार्य शुरू करने के लिए विभागीय आदेश मिल गई है. 

 

ग्रामीणों ने प्रकट किया आभार

18 जनवरी यानी रविवार से इस राजमार्ग का सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू होगा. इस सड़क के सुदृढ़ीकरण कार्य शुरू होने की खबर पाकर स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है. स्थानीय लोगों ने मंत्री के प्रति आभार प्रकट किया है. मौके पर प्रखंड प्रमुख प्रदीप तामसोय, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष चिरिया बिरुली, मुखिया गुरुचरण मुंडा, विनोद गोप समेत अन्य उपस्थित रहे.

 

मंत्री ने की सकारात्मक पहल

स्थानीय लोगों कहना है कि इस जर्जर सड़क से काफी परेशान थे. ग्रामीणों को हो रही परेशानियों को देखते हुए दो सप्ताह पहले ही झींकपानी समेत आसपास के ग्रामीणों ने मंत्री को एक पत्र लिखकर एनएच-75 को सुदृढ़ीकरण कार्य कराने की मांग की थी. मंत्री ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सकारात्मक पहल की. जिसके बाद सड़क के सुदृढ़ीकरण कार्य के लिए विभागीय आदेश जारी हो गया.

 जोड़ापोखर से लोकेसाई तक जर्जर मार्ग

ग्रामीणों ने मंत्री को बताया था कि झींकपानी प्रखण्ड अन्तर्गत जोड़ापोखर से लोकेसाई तक एवं टोंटो प्रखण्ड अंतर्गत तालाबुरू में राजमार्ग जर्जर स्थिति में है. ग्रामवासियों के लिए यह मार्ग अपने रोज़मर्रा के कामों के लिए जीवन रेखा की तरह है. राजमार्ग की स्थिति दयनीय होने के कारण स्कूली बच्चों, ग्रामीणों, राहगीरों के साथ-साथ व्यापारियों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. 

 

यही नहीं भारी वाहनों के चलने के कारण उड़ती धूल से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है. मार्ग जर्जर होने के कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. मार्ग जर्जर होने के कारण अक्सर भारी वाहन बीच रास्ते में ही खराब हो जाते हैं, जिससे कई दिनों तक जाम की स्थिति बनी रहती है. यात्री बसें भी वैकल्पिक मार्ग का प्रयोग कर रहें हैं, जिससे यात्रियों को बस पकड़ने के लिए 8 से 10 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है. 

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