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Nilambar Pitambar University : VC दिनेश सिंह के कारनामों की राज्यपाल से फिर शिकायत

Ranchi :  किताब खरीद मामले में नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति दिनेश कुमार सिंह के खिलाफ राज्यपाल से शिकायत की गयी है. इसमें कुलपति पर बिना वित्त समिति और क्रय समिति के सहमति के ही जनता शिवरात्रि कॉलेज को किताब खरीदने की अनुमति देने और 37 लाख रुपये का भुगतान कराने का आरोप लगाया गया है.

 

किताब खरीद मामले में दिनेश कुमार सिंह के खिलाफ राज्यपाल को मिली यह दूसरी शिकायत है. शिकायत में कहा गया है कि जनता शिवरात्रि कॉलेज द्वारा किताब खरीदने के प्रस्ताव पर कुलपति ने वित्त समिति और क्रय समिति की सहमति के बिना ही अनुमति दे दी.

 

कुलपति द्वारा किताब खरीदने के मुद्दे पर दी गयी अनुमति पर विश्वविद्यालय स्तर पर आपत्ति की गयी थी. इसमें खरीद के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं के उल्लंघन का उल्लेख किया गया था. इसके बावजूद कुलपति की अनुमति के आलोक में किताब खरीदने के लिए कॉलेज ने विज्ञापन प्रकाशित किया.

 

राज्यपाल को मिली शिकायत में मनोविज्ञान प्रयोगशाला से संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए विज्ञापन प्रकाशित करने का आरोप लगाया गया है. इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया है.

 

जनता शिवरात्रि कॉलेज द्वारा प्रकाशित विज्ञापन के आलोक में किताबों की आपूर्ति कर दी गयी है. साथ ही कॉलेज द्वारा 37 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है. बताया जाता है कि इसमें ऐसी किताबें भी खरीदी गयी हैं, जिसकी उपयोगिता छात्रों के लिए नहीं है.

 


उल्लेखनीय है कि किताब खरीदने में दिनेश सिंह की दिलचस्पी से जुड़ी यह दूसरी शिकायत है. खरीद की इस प्रक्रिया में श्रीवास्तव नामक एक व्यक्ति चर्चा में है. दिनेश सिंह के खिलाफ किताब खरीद मामले में पहली शिकायत उस वक्त मिली थी, जब वह रांची विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति थे.

 

उस वक्त उन्होंने खूंटी में कॉलेज के प्रिंसिपल पर एक खास व्यक्ति को फर्नीचर और किताब सप्लाई का आदेश देने के लिए दबाव बनाया था. लेकिन इस मामले में राज्यपाल को मिली शिकायत के बाद उन्हें रांची विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति के पद से हटा दिया गया था.

 

विनोबा भावे विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति के रूप में कार्य करने के दौरान भी उन पर कई गंभीर आरोप लगे थे. आरोपों से संबंधित सभी काम ऐसे थे, जिसमें सरकारी व्यवस्था के दौरान कमीशनखोरी की चर्चा होती रहती है.

 

विनोबा भावे विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति के रूप में काम करने के दौरान उनके द्वारा दो करोड़ रुपये की लागत से गेस्ट हाउस के साज सज्जा का प्रस्ताव काफी विवादों में रहा था. लेकिन उनका यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुआ था.

 

 

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