Patna : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद (MLC) की पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है. राज्यसभा चुनाव में निर्विरोध चुने जाने के बाद उन्होंने उच्च सदन जाने का फैसला लिया है. इसके साथ ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी एमएलए के पद से इस्तीफा दे दिया है.
सीएम नीतीश अब दिल्ली की राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे. चारों सदनों के सदस्य रहने का गौरव हासिल करने वाले नीतीश कुमार का ये निर्णय राज्य की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव का संकेत है.
सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की है. उन्होंने अपना इस्तीफा दिया है. उनका इस्तीफा स्वीकार हो गया है. सभापति ने कहा कि आज बिहार की गिनती एक विकसित राज्य में हो रही है.
नीतीश कुमार के इस फैसले से जनता काफी मायूस थी. पार्टी के कार्यकर्ताओं में उनके इस फैसले से आक्रोश था. उन्होंने कार्यालय में तोड़फोड़ भी की थी. जदयू प्रदेश महासचिव अमरेंद्र दास उनके आवास के बाहर अनशन पर बैठ गए थे. हाथों में बैनर लेकर उनसे बिहार न छोड़ने की गुहार लगा रहे थे.
इस्तीफे से ठीक पहले उन्होंने जदयू के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की. इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी व अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे.
नीतीश कुमार ने संसदीय जीवन की शुरुआत 1985 में नालंदा की हरनौत विधानसभा सीट से विधायक बनकर की थी. इसके बाद 1989 में वे पहली बार नौवीं लोकसभा के सदस्य बने और केंद्र में अपनी धमक दिखाई. साल 2006 से वे लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे थे.
बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शराबबंदी, छात्राओं के लिए साइकिल योजना और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50% आरक्षण देने जैसे उनके फैसलों ने देश के अन्य राज्यों के लिए रोल मॉडल का काम किया. अब राज्यसभा में उनकी उपस्थिति राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को प्रभावित करने वाली साबित होगी.
वहीं, नितिन नबीन ने 2006 से लगातार बांकीपुर सीट (पटना) का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे. राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के कारण अब वे राज्य की राजनीति से केंद्र की ओर रुख किया. अब बांकीपुर सीट पर अब उपचुनाव कराया जाएगा.
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