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NJA की गाइडलाइन : अदालतें लज्जा भंग-हवस, इज्जत, रखैल, पवित्रता जैसे शब्दों का इस्तेमाल न करें, सबूतों पर फैसला दें

राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (NJA) द्वारा जारी एक गाइडलाइन में जजों को सलाह दी गयी है कि वे दुष्कर्म, सेक्शुअल हैरेसमेंट जैसे मामलों की सुनवाई और फैसले लिखते समय कुछ सावधानियां बरतें. गाइडलाइन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जारी की गयी है.
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 New Delhi : राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (NJA) द्वारा जारी एक गाइडलाइन में जजों को सलाह दी गयी है कि वे दुष्कर्म, सेक्शुअल हैरेसमेंट जैसे मामलों की सुनवाई और फैसले लिखते समय कुछ सावधानियां बरतें. गाइडलाइन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जारी की गयी है.

 

NJA की एक्सपर्ट कमेटी ने रेप के मामलों में जजों को सलाह दी है कि वे पीड़िता के चरित्र ,वस्त्र, जीवनशैली, नैतिक धारणाओं के बजाय केवल सबूतों के आधार पर फैसला दें. कमेटी ने लज्जा भंग, प्रोसिक्यूट्रिक्स, बेबस महिला, हवस, इज्जत, शर्म और पवित्रता जैसे शब्दों का प्रयोग करने से बचने की भी सलाह दी है.

 

NJA द्वारा तैयार की गयी ज्यूडीशियल सेंसिटिविटी हैंडबुक को सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 में मंजूरी प्रदान करते  हुए निर्देश दिया है कि देश की सभी अदालतें इसका पालन करें. NJA की एक्सपर्ट कमेटी के हेड सुप्रीम कोर्ड के पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस थे.

 

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि न्यायिक भाषा अभिव्यक्ति का जरिया ही नहीं, निष्पक्ष, गरिमापूर्ण और पक्षपात-रहित न्याय का आधार भी है.जजों से कहा गया है कि असंवेदनशील भाषा,पीड़ित को दोषी ठहराने वाले कमेंट, सर्वाइवर्स को आघात पहुंचा सकते हैं. इसलिए कोर्ट को चाहिए कि वह सम्मानजनक, तटस्थ और सर्वाइवर-सेंट्रिक भाषा अपनाये.

 

अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता में यह कमेटी10 फरवरी, 2026 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद गठित की गयी थी, जिसमें यौन अपराधों और कमजोर लोगों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाले जजों में संवेदनशीलता और सहानुभूति को बढ़ावा देने के लिए गाइडलाइंस बनाने को कहा गया था.

 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला तब आया जब उलने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित आदेश का स्वतः संज्ञान लिया।, हाई कोर्ट ने कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के स्तन पकड़ना और उसके पाजामे का नाड़ा खोलना रेप की कोशिश नहीं माना जायेगा.  इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस विवादित फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2023 की जेंडर स्टीरियोटाइप्स हैंडबुक की समीक्षा करते हुए नयी गाइडलाइन तैयार करने का निर्देश दिया था.

 

8 मार्च, 2023 को महिला दिवस पर एक कार्यक्रम में तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ ने  कुछ ऐसे फैसलों का जिक्र किया था, जिनमें किसी महिला के एक व्यक्ति के साथ रिश्ते में रहने पर उसे रखैल लिखा गया.  कई मुकदमे ऐसे  थे जिनमें घरेलू हिंसा अधिनियम और IPC की धारा 498ए के तहत FIR रद्द करने के लिए आवेदन आये थे,उनके फैसलों में महिलाओं को चोर बताया गया था.

 

उसके बाद CJI चंद्रचूड़ ने एक कानूनी शब्दावली अपनाने का फैसला किया.कानूनी शब्दावली के संदर्भ में हैंडबुक साल 2023 में लॉन्च की गयी. इसे कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य की अध्यक्षता वाली समिति ने तैयार किया था, समिति में रिटायर्ड जस्टिस प्रभा श्रीदेवन, जस्टिस गीता मित्तल, प्रो.झूमा सेन शामिल थीं.16 अगस्त 2023 को हैंडबुक जारी करते समय  CJI चंद्रचूड़ ने कहा था- इस हैंडबुक से जज और वकील यह समझ पायेंगे कि कौन सी शब्दावली रूढ़िवादी हैं.उनसे कैसे बचा जा सकता है. 

 

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