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सहायक आचार्य नियुक्ति में नॉर्मलाइजेशन मामला: BIT मेसरा की समिति ने सीलबंद बंद रिपोर्ट की प्रस्तुत

Ranchi News: BIT ने अपनी रिपोर्ट में नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला को सही ठहराया है और कहा है इसमें कोई त्रुटि या विसंगति नहीं है. दरअसल, पिछली सुनवाई में अदालत ने बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा के रजिस्ट्रार को मामले में  प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया था.
 
झारखंड हाईकोर्ट

Ranchi News: प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में अपनाए गए नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा की समिति ने नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले को लेकर सील बंद रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की. कोर्ट ने इस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद इसकी एक-एक प्रति कोर्ट ने प्रार्थी, महाधिवक्ता एवं जेएसएससी को उपलब्ध कराया. कोर्ट ने मामले के अगली सुनवाई 20 नवंबर निर्धारित की है. 

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BIT ने अपनी रिपोर्ट में नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला को सही ठहराया है और कहा है इसमें कोई त्रुटि या विसंगति नहीं है. दरअसल, पिछली सुनवाई में अदालत ने बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा के रजिस्ट्रार को मामले में  प्रतिवादी बनाने का निर्देश दिया था. अदालत ने BIT, मेसरा को नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया की तकनीकी एवं विशेषज्ञ स्तर पर जांच के लिए एक विशेषज्ञ कमिटी गठित करने का भी निर्देश दिया था.

 

गठित की जाने वाली कमिटी में संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल करने को कहा गया था. कमिटी यह जांच करनी थी कि परीक्षा में अपनाया गया नॉर्मलाइजेशन का फॉर्मूला तकनीकी एवं गणितीय रूप से उचित है अथवा नहीं, साथ ही यह भी देखा जाना था कि नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाते समय निर्धारित नियमों एवं आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं.

 

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स, अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता एवं अन्य अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा. वही जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने पक्ष रखा.

क्या है रिपोर्ट में

बीआईटी मेसरा की आंतरिक विशेषज्ञ समिति ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की नॉर्मलाइज़ेशन प्रक्रिया को सांख्यिकीय रूप से सही और वैज्ञानिक बताया है. समिति ने यह निष्कर्ष इस शर्त पर दिया है कि प्रक्रिया की आवश्यक मान्यताएं पूरी हों.

 

हाईकोर्ट के 28 सितंबर 2026 के आदेश के अनुपालन में बीआईटी के रजिस्ट्रार डॉ. राजेश जैन ने 14 अक्तूबर को आठ सदस्यीय समिति गठित की थी. जेएसएससी की ओर से उप सचिव-सह-परीक्षा नियंत्रक  और प्रशाखा पदाधिकारी  ने 22 अक्तूबर की बैठक में जानकारी दी.

 

26 अक्तूबर की बैठक में समिति ने पाया कि जेएसएससी ने झारखंड प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 (JPSTAACCE) में एक सुस्थापित सांख्यिकीय विधि अपनाई. इसका फॉर्मूला सही ढंग से लिखा गया है, संख्यात्मक सन्निकटन सटीक है और गणना में कोई त्रुटि नहीं है.

 

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