Ranchi : कभी इस्पात नगरी, उद्योग और अमन-चैन की पहचान रखने वाला जमशेदपुर आज एक ऐसे खौफनाक मंजर से गुजर रहा है, जहां सड़कों पर चापड़ और गोलियों की आवाज लोगों के जेहन में दहशत पैदा कर रही है. हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि लोग तंज कसते हुए पूछने लगे हैं—क्या अब जमशेदपुर को "चापड़पुर" कहा जाए?
करीब तीन महीनों के भीतर शहर में 15 से अधिक जगहों पर फायरिंग की घटनाएं सामने आई हैं. वहीं, चाइनीज चापड़ से 22 से अधिक लोगों पर जानलेवा हमले किए गए, जिनमें 6 से 7 लोगों की मौत हो चुकी है. कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इन घटनाओं ने शहर के अमन-ओ-सुकून पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
सबसे चिंताजनक बात यह है कि चापड़ अब अपराधियों का सबसे आसान और पसंदीदा हथियार बनता जा रहा है. बाजार में इसकी आसान उपलब्धता और बेहद कम कीमत अपराधियों के लिए इसे और सुविधाजनक बना रही है. खुलेआम बिक रहे इन धारदार हथियारों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से अपराधियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं.
कुछ महीने पहले महज 11 दिनों के भीतर चापड़ से सात जानलेवा हमले हुए थे. इसके बाद शहर में इसकी बिक्री पर रोक लगाने और सख्त नियम बनाने की मांग उठी थी. जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे को उठाया, पुलिस ने भी नियम बनाने की बात कही, लेकिन सवाल यह है कि आखिर जमीन पर कितना बदलाव आया?
आज हालात यह हैं कि शहर के अलग-अलग इलाकों से कभी फायरिंग, कभी चापड़ से हमला और कभी हत्या की खबरें सामने आ रही हैं. कानून का खौफ नदारद दिखाई देता है और आम लोगों में असुरक्षा की भावना लगातार बढ़ रही है. शाम ढलते ही कई इलाकों में लोग खुद को असहज महसूस करने लगे हैं.
बेशक पुलिस कई मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार कर रही है, हथियार भी जब्त हो रहे हैं, लेकिन जब अपराध लगातार उसी रफ्तार से दोहराए जाएं तो कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है. आखिर अपराधियों के हाथों तक चापड़ और हथियार इतनी आसानी से कैसे पहुंच रहे हैं? इस पर गंभीर मंथन की जरूरत है.
अब सवाल सिर्फ चापड़ का नहीं, बल्कि शहर की बदलती पहचान का है. अगर यही हालात रहे तो कहीं ऐसा न हो कि इस्पात नगरी के नाम से मशहूर जमशेदपुर की पहचान लोगों की जुबान पर "चापड़पुर" बनकर रह जाए.
क्यों बढ़ रहा है चापड़ का इस्तेमाल?
जानकारों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, चापड़ अपराधियों की पहली पसंद इसलिए बनता जा रहा है क्योंकि यह बाजार में 50 से 100 रुपये जैसी कम कीमत पर आसानी से मिल जाता है. इसे खरीदने के लिए किसी विशेष अनुमति की जरूरत नहीं होती. वहीं, हत्या या हमले के बाद इसे घटनास्थल पर छोड़ देने या फेंक देने पर इसे किसी व्यक्ति से जोड़ना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है. हालांकि, पुलिस आधुनिक फॉरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास करती है.
फायरिंग की बढ़ती घटनाएं
- कदमा थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश को लेकर दो गुटों के बीच हिंसक झड़प और फायरिंग हुई, जिसमें तीन युवक घायल हो गए.
- एसएसपी कार्यालय से करीब 50 मीटर की दूरी पर एक युवक ने गोली चला दी. पुलिस ने घटनास्थल से खोखा बरामद किया.
- गोलमुरी थाना क्षेत्र के देबू बगान में देर रात हुई गोलीबारी में मिठाई खरीदने गए राहगीर दीपक झा के पैर में गोली लगी.
- दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के बाद पत्थरबाजी और फायरिंग हुई, जिसमें पुलिस ने चार आरोपियों को हथियार के साथ गिरफ्तार किया.
- मानगो के डिमना बस्ती में विक्की राजपूत पर जानलेवा हमला हुआ. पुरानी रंजिश में बदमाशों ने गोली मार दी.
- आदित्यपुर में गैंगवार के दौरान सात राउंड फायरिंग हुई, जिसमें एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया.
चापड़बाजी की प्रमुख घटनाएं
- TRF कंपनी के पास ट्रक चालक पर चापड़ से जानलेवा हमला.
- साकची टैंक रोड में चापड़बाजी की खूनी वारदात.
- बिष्टुपुर स्थित DD परिसर के बाहर पुलिस की मौजूदगी में चापड़ से हत्या.
- टेल्को थीम पार्क के पास युवक पर चापड़ से जानलेवा हमला.
- पुरानी रंजिश में दो लोगों पर चापड़ से हमला, दोनों गंभीर रूप से घायल.
लगातार हो रही चापड़बाजी और फायरिंग की घटनाओं ने आम लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया है. कई मामलों में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया है और हथियार भी जब्त किए हैं, लेकिन घटनाओं का सिलसिला पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा.
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