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अब सरकारी भवनों व जमीन का किराया पहले ही चुकाना होगा, नए वित्तीय नियम में है प्रावधान, मसौदा तैयार

Ranchi: अब सरकारी भवनों और जमीन का किराया पहले ही चुकाना होगा. नए वित्तीय नियम के तैयार मसौदा में इसका प्रावधान किया गया है. तैयार मसौदा में कहा गया है कि जब कोई सार्वजनिक भवन, भूमि या अन्य संपत्ति किसी ऐसे व्यक्ति को किराए पर दी जाती है जो सरकारी सेवा में नहीं है, तो पूरा निर्धारित किराया अग्रिम रूप से वसूल किया जाना चाहिए.
 

Ranchi: अब सरकारी भवनों और जमीन का किराया पहले ही चुकाना होगा. नए वित्तीय नियम के तैयार मसौदा में इसका प्रावधान किया गया है. तैयार मसौदा में कहा गया है कि जब कोई सार्वजनिक भवन, भूमि या अन्य संपत्ति किसी ऐसे व्यक्ति को किराए पर दी जाती है जो सरकारी सेवा में नहीं है, तो पूरा निर्धारित किराया अग्रिम रूप से वसूल किया जाना चाहिए.  मसौदा में सरकारी भवनों और भूमि के किराए की मांग के साथ वसूली से संबंधित विस्तृत नियम और प्रक्रिया को भी उल्लेखित किया गया है.  


क्या किए गए हैं प्रावधान


•    जब किसी किराए योग्य भवन का रखरखाव लोक निर्माण विभाग के अलावा किसी अन्य सिविल विभाग को सौंपा जाता है, तो संबंधित विभाग का प्रमुख उसके किराए की उचित वसूली के लिए जिम्मेदार होगा.


•    ऐसे भवनों के किराए के आकलन और वसूली की प्रक्रिया सामान्यतः लोक निर्माण विभाग के प्रत्यक्ष प्रभार के अंतर्गत आवासों पर लागू नियमों द्वारा विनियमित होगी.


•    विभाग के प्रभारी किराए योग्य भवनों में रहने वाले सरकारी कर्मचारियों से किराए की वसूली या तो नकद में या राज्य सरकार के निर्देशानुसार कोषागार अधिकारी या अन्य संबंधित संवितरण अधिकारियों के माध्यम से उनके वेतन-पत्रों से कटौती करके की जा सकती है.

 

वित्त विभाग की सहमति भी जरूरी


तैयार मसौदा में कहा गया है कि कोई भी विभाग या प्राधिकरण, वित्त विभाग की पूर्व सहमति के बिना, कोई भी आदेश जारी नहीं कर सकता है. जिसमें भूमि का कोई अनुदान, या राजस्व का समनुदेशन, या खनिज या वन अधिकारों की रियायत, अनुदान, पट्टा, या लाइसेंस, या जल, विद्युत का अधिकार, या ऐसी रियायतों के संबंध में कोई सुखभोग या विशेषाधिकार शामिल हो.


सरकारी विभागों के लिए खर्च नियंत्रण के नियम


सरकारी विभागों को स्वीकृत अनुदानों और विनियोगों के विरुद्ध खर्च के नियंत्रण के लिए उत्तरदायी होना होगा. यह नियंत्रण विभागाध्यक्षों और अन्य नियंत्रक अधिकारियों, यदि कोई हों और उनके अधीनस्थ डीडीओ के माध्यम से किया जाएगा. 
ऐसा कोई खर्च नहीं किया जाएगा, जिसका प्रभाव किसी वित्तीय वर्ष के लिए विधानसभा द्वारा विधि द्वारा अधिकृत कुल अनुदान या विनियोग से अधिक हो, सिवाय इसके कि पूरक अनुदान या विनियोग या आकस्मिकता निधि से अग्रिम प्राप्त किया गया हो.

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