Ranchi : झारखंड के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपतियों की हालिया नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो रहा है. कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने इन नियुक्तियों पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार और राजभवन की भूमिका पर आपत्ति जताई है.
एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विनय उरांव ने कहा कि झारखंड के विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति के दौरान स्थानीय शिक्षाविदों और प्रतिभाओं की अनदेखी की गई है. उनका आरोप है कि जब विश्वविद्यालय लंबे समय तक प्रभार पर चल रहे थे तब स्थानीय लोगों से काम लिया गया, लेकिन स्थायी नियुक्ति के समय बाहर के राज्यों से लोगों को लाकर पद दिया गया.
हाल ही में झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में डॉ. अभय कुमार सिंह, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में डॉ. राजीव मनोहर और जमशेदपुर वुमेन्स यूनिवर्सिटी में डॉ. एला कुमार को कुलपति नियुक्त किया गया है, जो झारखंड से बाहर के हैं.
विनय उरांव ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियां स्थानीय छात्रों और शिक्षकों के मनोबल को कमजोर करती हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या झारखंड के विश्वविद्यालयों में योग्य प्रोफेसरों की कमी है.
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की जांच कराने और भविष्य में स्थानीय योग्य उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की मांग की है. साथ ही चेतावनी दी कि यदि इस मुद्दे पर सुधार नहीं हुआ तो एनएसयूआई और छात्र संगठन आंदोलन करने को मजबूर होंगे. उधर, रांची विश्वविद्यालय में भी स्थायी कुलपति की नियुक्ति नहीं होने पर उन्होंने चिंता जताई और वहां किसी स्थानीय योग्य शिक्षाविद को कुलपति बनाने की मांग की.
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