Ranchi: झारखंड विधानसभा के शून्यकाल के दौरान विधायक जनार्दन पासवान ने रैयतों के लंबित मुआवजे का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया. उन्होंने कहा कि राज्य में चल रही खनन परियोजनाओं से प्रभावित रैयतों को अब तक पूर्ण और न्यायसंगत मुआवजा नहीं मिला है, जिससे ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है.
जनार्दन पासवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक प्रभावित रैयतों को उचित मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक NTPC और आडानी की खनन गतिविधियों पर रोक लगाई जानी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद मुआवजे का भुगतान लंबित है या फिर भुगतान को लेकर विवाद उत्पन्न हो गए हैं.
उन्होंने कहा कि जमीन ही ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य आधार है. यदि जमीन चली जाती है और समय पर मुआवजा नहीं मिलता, तो परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है. कई रैयत वर्षों से मुआवजे के इंतजार में हैं, जिससे उनके जीवन-यापन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.
विधायक ने यह भी मांग की कि जिन मामलों में मुआवजे को लेकर विवाद है, उन्हें प्रशासनिक स्तर पर थोपे गए निर्णयों के बजाय रैयतों की सहमति से सुलझाया जाए. उन्होंने सुझाव दिया कि जिला प्रशासन, कंपनी प्रतिनिधि और प्रभावित रैयतों की संयुक्त बैठक कर पारदर्शी तरीके से समाधान निकाला जाए.
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