Ranchi : केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद एनटीपीसी की जमीन पर योगेंद्र साव द्वारा बनाये गये अवैध संरचना को ध्वस्त कर दिया गया. एनटीपीसी ने ध्वस्त किये गये संचरना के मुआवजा के तौर पर 1.97 करोड़ रुपये ट्रिब्यूनल में जमा कर दिया है. इसके बावजूद योगेंद्र साव कोयला उत्पादन और ढुलाई को प्रभावित कर रहे हैं. इससे राज्य सरकार को हर दिन 1050 रुपये प्रति टन की दर से राजस्व का नुकसान हो रहा है.
प्रशासन ने अवैध तरीके से तैयार संरचना को किया ध्वस्त
उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी के चट्टी बरियातु कोल माइनिंग प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहित जमीन पर पगार गांव में योगेंद्र साव ने अवैध तरीके से एक संरचना तैयार की थी. इसमें एक चिमनी और एक घर शामिल है. कोल परियोजना के विस्तार के लिए एनटीपीसी की जमीन पर खड़ी संरचना को हटाना जरुरी था.
इस संरचना को हटाने के लिए जिला प्रशासन और एनटीपीसी के अधिकारियों की कई दौर की बैठकें हुईं. केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने भी झारखंड के मुख्यमंत्री को इसमें हस्तक्षेप कर संरचना हटाने का अनुरोध किया. इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया संरचना को हटाने के लिए तीन बार नोटिस जारी किया गया.
संरचना के मुआवजे के रूप में 1.87 करोड़ रुपये ट्रिब्यूनल में जमा कराया गया. लेकिन योगेंद्र साव द्वारा संरचना खुद नहीं हटाने की वजह से जिला प्रशासन की मदद से एक अगस्त 2025 को संरचना को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गयी. इसमें सिर्फ चिमन को ध्वस्त किया गया. बाकी संरचना ध्वस्त नहीं किया जा सका.
कोयले की ढुलाई-उत्पादन प्रभावित करने की कोशिश
चिमनी ध्वस्त किये जाने के बाद पूर्व विधायक योगेंद्र साव कोयले की ढुलाई और उत्पादन प्रभावित करने के लिए तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं. पहले उन्होंने सड़क पर दीवार खड़ी कर कोयले की ढुलाई पर बाधा डाली. इसके बाद अपने सहयोगियों के साथ तीर धनुष लेकर खदान में घुसकर कर्मचारियों को डराने धमकाने लगे.
सरकार को हर दिन प्रति टन 1050 रुपये के राजस्व का नुकसान
पूर्व विधायक की इस हरकत से एनटीपीसी कोल परियोजना से उत्पादन और कोयले की ढुलाई प्रभावित हो रही है. इससे राज्य सरकार को प्रति दिन औसतन 1050 रुपये प्रति टन की दर से राजस्व का नुकसान हो रहा है.
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